युवाओं के प्रेरणास्त्रोत: अंगद और अभिमन्यु के गुणों को अपनाएं

युवाओं के प्रेरणास्त्रोत: अंगद और अभिमन्यु के गुणों को अपनाएं

दुनियाभर के समाजों में हमेशा से ही युवाओं को भविष्य का आधार माना गया है। भारतीय संस्कृति और परंपरा में शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ संस्कारों को भी बहुत अधिक महत्व दिया जाता रहा है, जो यहां के कण-कण में रसा बसा है।

युवाओं के प्रेरणास्त्रोत: अंगद और अभिमन्यु के गुणों को अपनाएं

अंगद और अभिमन्यु: युवाओं के लिए आदर्श प्रतीक

रामायण के अंगद और महाभारत के अभिमन्यु को हमारे देश के युवाओं के लिए दो प्रमुख आदर्श प्रतीक माना गया है। रावण के दरबार में अंगद द्वारा पैर जमाए जाने की घटना को दुनिया की पहली युवा धर्म-संसद के रूप में देखा जा सकता है, जिसकी धमक आज के युवाओं को भी समझनी चाहिए। जहां अभिमन्यु का जीवन कुछ अधूरा रह गया था, वहीं अंगद ने अपने सौंपे गए कार्य को पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया था।

संस्कार और निर्भयता का महत्व

युवाओं से हमेशा यह अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी परिस्थिति में भयमुक्त रहें और अपने नैतिक संस्कारों को कभी न भूलें। मानवता के भविष्य को सहेजने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आज की युवा पीढ़ी के कंधों पर ही टिकी हुई है। स्वामी विवेकानंद और स्वामी अवधेशानंद गिरी जैसे विचारकों ने भी मानवता के भविष्य में युवाओं की अहम भूमिका पर जोर दिया है।

युवाओं के प्रेरणास्त्रोत: अंगद और अभिमन्यु के गुणों को अपनाएं

भविष्य की दिशा

आज के दौर में जब हर तरफ नई चुनौतियां सामने आ रही हैं, तब युवाओं के लिए जरूरी है कि वे प्राचीन पौराणिक चरित्रों से प्रेरणा लें। निर्भयता और संस्कारों का यह अनूठा मेल ही आने वाले समय में समाज और देश को एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।

Anju Kunwar

Learn More →