पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी द्वारा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को देश के लिए बड़ा खतरा बताए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उनके इस बयान पर विश्व हिंदू परिषद के साथ-साथ कई प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी असहमति जताई है और इसे विभाजनकारी करार दिया है।

एजी नूरानी स्मृति व्याख्यान में दिया गया था बयान
पूर्व उपराष्ट्रपति ने एक स्मृति व्याख्यान के दौरान संविधान विशेषज्ञ और लेखक एजी नूरानी की एक पुस्तक का हवाला दिया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक पुरानी टिप्पणी को दोहराते हुए कहा था कि भारत के लिए साम्यवाद के मुकाबले हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता अधिक बड़ा खतरा है। अंसारी ने नागरिक राष्ट्रवाद की जगह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उभार पर भी अपनी चिंता जाहिर की थी। उनका कहना था कि ऐसी प्रवृत्तियों से नागरिकों में धर्म के आधार पर अलगाव बढ़ सकता है।
विश्व हिंदू परिषद की कड़ी निंदा
अंसारी के इस बयान पर विश्व हिंदू परिषद ने कड़ा ऐतराज जताया है। विहिप के प्रवक्ताओं का कहना है कि बहुसंख्यक समाज के खिलाफ इस प्रकार की टिप्पणियां करने से पहले उन्हें अपने पूर्व संवैधानिक पद और देश की विविधता का ध्यान रखना चाहिए था। हिंदू समाज के उभार को चरमपंथ बताना बेहद शर्मनाक बताया गया है और अन्य प्रकार के उग्रवादों पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी बनाई दूरी
इस पूरे मामले पर कुछ प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी हामिद अंसारी के बयान से अपनी दूरी बना ली है। अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी और ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रमुख मौलाना साजिद राशिदी ने इस प्रकार की बयानबाजी को समाज में तनाव बढ़ाने वाला बताया है। उनका मानना है कि किसी भी समुदाय के विरुद्ध नफरत फैलाने वाली भाषा से बचना चाहिए और इस तरह के बयानों से सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ सकता है।

