देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधनों को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से वंचित और कमजोर परिवारों के 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं पर केंद्रित है, ताकि उन्हें टिकाऊ आजीविका के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया जा सके। ग्रामीण इलाकों में कई परिवारों का भविष्य खेती या छोटे-मोटे कामों पर निर्भर होता है, ऐसे में यह योजना युवाओं के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।

कौशल प्रशिक्षण से बदली तकदीर
आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले कई युवाओं के लिए यह योजना वरदान साबित हुई है। नागालैंड की विमेथानो सखरी ने हाई स्कूल के बाद की पढ़ाई रुक जाने पर डीडीयू-जीकेवाई के तहत पर्यटन और आतिथ्य प्रशिक्षण कार्यक्रम में दाखिला लिया। इसके बाद उन्हें बेंगलुरु में खाद्य एवं पेय सेवा के क्षेत्र में पहली नौकरी मिली, जिससे उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ। इसी तरह, बिहार के चंदन शाह ने सहायक इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण लिया और अपनी मेहनत के बल पर आज वे विदेश में काम करते हुए अपने परिवार को आर्थिक मजबूती दे रहे हैं।
रोजगार से लेकर स्वरोजगार तक के अवसर
इस योजना के जरिए न केवल देश के भीतर बल्कि स्थानीय स्तर पर भी स्वरोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। असम की रूपाली हासदा ने सिलाई मशीन ऑपरेटर का प्रशिक्षण लेने और कुछ समय बाहर काम करने के बाद अपने गृह क्षेत्र में ही सिलाई-कटाई केंद्र शुरू किया। इसके माध्यम से वे न केवल खुद कमाई कर रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। झारखंड के हीरालाल पंडित ने स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर अस्पताल में नौकरी हासिल की और अपनी शारीरिक चुनौतियों को पार करते हुए आत्मनिर्भर बने।

योजना का उद्देश्य और प्रगति
डीडीयू-जीकेवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युवाओं को मिलने वाला प्रशिक्षण रोजगार में बदले और वह रोजगार लंबे समय तक चले। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत लाखों ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार मिला है। यह पहल ग्रामीण भारत के युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और एक सुरक्षित भविष्य बनाने का अवसर प्रदान कर रही है।

