बैंक खाताधारक के निधन के बाद उनके खातों में मौजूद रकम को हासिल करने के नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी अक्सर परिजनों को नहीं होती है। यदि बैंक खाते में पहले से ही नॉमिनी का नाम दर्ज है, तो ऐसी स्थिति में दावा प्रस्तुत करने और राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है। निर्धारित औपचारिकताओं और जरूरी दस्तावेजों को जमा करने के बाद बैंक द्वारा इन मामलों का निपटारा किया जाता है।

नॉमिनी होने पर क्लेम करने का तरीका
खाताधारक की मृत्यु के पश्चात नॉमिनी व्यक्ति को संबंधित बैंक शाखा में जाकर अपना दावा पेश करना होता है। इसके लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से या फिर सीधे बैंक शाखा से दावा फॉर्म प्राप्त किया जा सकता है। इस फॉर्म को सही ढंग से भरकर और साथ में आवश्यक दस्तावेज संलग्न करके बैंक में जमा कराना होता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद पंद्रह दिन के भीतर इस प्रकार के दावों का निस्तारण किया जाना आवश्यक है।
यदि खाते में नॉमिनी का नाम न हो
अगर किसी बैंक खाते में नॉमिनी का नाम नहीं जोड़ा गया है, तो पैसे निकालने की प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में बैंक द्वारा कुछ अतिरिक्त दस्तावेजों और प्रमाणों की मांग की जा सकती है। दावेदार को बैंक के नियमों के अनुसार सभी जरूरी कागजात जुटाकर जमा करने होते हैं, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई होती है।

बैंक खातों में नॉमिनी रखना क्यों जरूरी है
विशेषज्ञों और बैंकों द्वारा हमेशा यह सलाह दी जाती है कि सभी ग्राहकों को अपने बैंक खातों में नॉमिनी की जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नॉमिनी का विवरण पूरी तरह से अपडेट और सही है। समय पर सही जानकारी उपलब्ध होने से खाताधारक के न रहने पर परिवार के सदस्यों को आर्थिक परेशानियों और लंबी कागजी कार्रवाई से राहत मिलती है।

