महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने नियमों के कथित उल्लंघनों के कारण पुणे के वडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के वेयरहाउस के दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। बंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में नए सिरे से कार्यवाही पूरी होने के बाद यह नियामक कदम उठाया गया है। कंपनी ने इस फैसले को निराशाजनक करार दिया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई
एफडीए के अनुसार, यह ताजा आदेश पुणे के डिवीजन 3 के सहायक आयुक्त (ड्रग्स) द्वारा जारी किया गया है। विभाग ने बंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में अपनी पिछली कार्यवाही को वापस लेते हुए कंपनी को एक संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद यह स्वतंत्र निर्णय लिया गया।
रिएक्टिन प्लस टैबलेट और पैकेजिंग से जुड़े मुद्दे
इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में ‘रिएक्टिन प्लस’ नामक शेड्यूल एच दवा रही है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दवा की पैकेजिंग पर ऐसे दावे और चित्र अंकित थे, जो नियमों के अनुरूप नहीं थे। नियामक ने इसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ‘मिसब्रांडिंग’ (भ्रामक ब्रांडिंग) का मामला माना। इसके अलावा, वेयरहाउस में भंडारण और प्रबंधन से जुड़ी कई कमियां भी पाई गईं।
भंडारण और रिकॉर्ड में मिलीं कमियां
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दवाओं के बक्से पैलेट या रैक की कमी के कारण सीधे फर्श पर रखे हुए थे और स्टॉक पर धूल जमी हुई थी। इसके साथ ही, एक्सपायर्ड दवाओं के लिए कोई अलग और स्पष्ट रूप से चिह्नित क्षेत्र नहीं था। खरीद और बिक्री के चालानों तथा भौतिक स्टॉक और कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड में भी विसंगतियां पाई गईं।
कंपनी की प्रतिक्रिया
एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य दवा आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं, सिप्ला ने एक बयान में कहा कि वह इस आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है। कंपनी ने दोहराया कि वह मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

