वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की तरफ से फैलाए जाने वाले झूठे प्रोपेगेंडा और बेबुनियाद दावों का भारत ने हमेशा से कड़ा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न सत्रों और सुरक्षा परिषद की बैठकों में जब भी पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ बयानबाजी की, भारतीय प्रतिनिधियों ने तथ्यों के साथ उसका पर्दाफाश किया है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का एजेंडा और भारत का जवाब
संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्रों में पाकिस्तानी नेताओं द्वारा अक्सर कश्मीर और अन्य आंतरिक मामलों पर गैर-जरूरी टिप्पणियां की जाती हैं। भारत ने हर बार यह स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और इस पर किसी भी बाहरी या तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। भारत के स्थायी मिशन के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुखरता से रखते हुए कहा है कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को मानवाधिकार या शांति पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
आतंकवाद और कूटनीतिक मोर्चे पर सच्चाई
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कई मौकों पर यह बात मजबूती से रखी है कि पाकिस्तान आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बना हुआ है। दुनिया के सामने यह तथ्य भी रखा गया है कि विभिन्न प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन और उनके सरगना पाकिस्तानी जमीन पर सक्रिय हैं। इसके बावजूद वहां की सरकार और तंत्र आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का दावा करते हैं, जो सरासर पाखंड है।
ऐतिहासिक और कूटनीतिक रणनीतियां
भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा जनवरी 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष आया था। तब से लेकर अब तक भारत अपने रुख पर अडिग रहा है कि यह द्विपक्षीय मामला है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ‘राइट टू रिप्लाई’ अधिकार का उपयोग करके, पुख्ता सबूत पेश करके और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली व आंतरिक विफलताओं का जिक्र करके उसके हर झूठ को बेनकाब करता आया है।

