सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पटियाला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के 28 वार्डों तथा बाघापुराना और धर्मकोट नगर परिषदों के 22 वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है। अदालत ने यह कदम एक तथ्यान्वेषी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर उठाया है, जिसमें इन वार्डों के पिछले चुनावों में अनियमितता और गड़बड़ियां पाई गई थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को स्वतंत्र और पारदर्शी ढंग से पूरा कराने के लिए पुख्ता न्यायिक निगरानी तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

विशेष न्यायिक निगरानी समिति और पर्यवेक्षक
अदालत ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे एक सप्ताह के भीतर एक निगरानी समिति का गठन करें। इस समिति में हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल होंगे जो अधिसूचना जारी होने से लेकर परिणाम घोषित होने तक पूरी चुनाव प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। इसके अलावा, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से बार के दो-तीन वरिष्ठ सदस्यों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने का भी अनुरोध किया गया है। नामांकन दाखिल करने से लेकर मतदान तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और इसे समिति को सौंपा जाएगा।
छह सप्ताह के भीतर पूरी होगी प्रक्रिया
पीठ ने निर्देश दिया है कि पंजाब सरकार चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारियों की वार्ड-वार सूची निगरानी समिति को सौंपेगी। चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा या हस्तक्षेप की शिकायत सीधे इस समिति से की जा सकती है, जो तुरंत इसकी जांच कर हाईकोर्ट को रिपोर्ट देगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रक्रिया के निष्पक्ष होने की पुष्टि करने के बाद ही चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। अदालत ने इन चुनावों को छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।
दिसंबर 2024 के चुनावों से जुड़ा है मामला
यह पूरा कानूनी विवाद दिसंबर 2024 के नगर निकाय चुनावों से उपजा है, जहां विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया था और उनके साथ मारपीट की गई थी। पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर के नेतृत्व में गठित एक सदस्यीय आयोग ने अपनी जांच में पाया कि 50 वार्डों में चुनाव प्रक्रिया बाधित हुई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने आयोग की सिफारिशों पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन वार्डों में दोबारा चुनाव कराने का यह अहम आदेश पारित किया।

