कानपुर की आर्डेनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री (OEF) ने भारतीय सेना के जवानों के लिए माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक के अत्यधिक ठंड वाले तापमान में काम करने वाले विशेष बूट तैयार किए हैं। लद्दाख की बर्फीली चोटियों और दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में तैनात सैनिकों को अब विदेशी जूतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ये नए जूते सैनिकों को 20,000 फीट की ऊंचाई और बर्फीली परिस्थितियों में भी आसानी से काम करने में सक्षम बनाएंगे।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मिली सफलता
रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत कानपुर के इस औद्योगिक केंद्र ने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सेना ने इन विशेष बहुउद्देशीय सैन्य जूतों को मंजूरी देने के बाद ₹40 करोड़ का आर्डर दिया है और इनकी आपूर्ति भी शुरू कर दी है।
इटली के आयातित जूतों से आधी कीमत पर उपलब्ध
ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (TCL) के सीएमडी डॉ. अनिल रंगा के अनुसार, पहले इस तरह के विशेष बहुउद्देशीय जूते विशेष रूप से एक इतालवी कंपनी द्वारा बनाए जाते थे और इन्हें इटली से आयात किया जाता था। आयातित जूतों की कीमत करीब ₹50,000 प्रति जोड़ी हुआ करती थी, जबकि अब कानपुर की इस फैक्ट्री में निर्मित ये बूट लगभग आधी कीमत यानी ₹25,000 में तैयार किए जा रहे हैं।

विभिन्न इलाकों के लिए उपयोगी तकनीक और अन्य डिजाइन
फैक्ट्री द्वारा विकसित की गई तकनीक विभिन्न प्रकार के भूभागों में सैनिकों की footwear आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है। इससे पहले भी OEF में तीन विशेष जूते के डिजाइन विकसित किए गए थे जो सैनिकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। इनमें जैतून हरे रंग के बूट (olive green boots), साबर लेदर बूट (suede leather boots) और काले चमड़े के बूट (black leather boots) शामिल हैं। इसके अलावा, फैक्ट्री पहले से ही सेना को हाई-एंकल बूट सहित विभिन्न प्रकार के जूते की आपूर्ति कर रही है और इस वर्ष उसे सेना के लिए लाखों जोड़े जूते बनाने का नया आर्डर भी प्राप्त हुआ है।

