हाल ही में चुनाव प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियों और मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर देश के विभिन्न विपक्षी दलों ने एकजुट होकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में राजधानी दिल्ली में हजारों लोगों ने ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाला और सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर अपनी मांगें रखीं।

सुप्रीम कोर्ट तक निकाला गया लोकतंत्र मार्च
कनाट प्लेस के बाराखंबा रोड से शुरू होकर यह मार्च कई रास्तों से गुजरते हुए सुप्रीम कोर्ट परिसर तक पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर अवरोध भी देखने को मिले, जिसके बाद कई बड़े नेता और सांसद बैरिकेड्स पार कर आगे बढ़े। इस विरोध प्रदर्शन में मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत कई शीर्ष विपक्षी नेता और हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए।
याचिका में एसआईआर और चुनाव आयुक्त पर सवाल
विपक्षी नेताओं ने सर्वोच्च अदालत में एक संयुक्त याचिका दायर की है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के ‘विशेष सघन पुनरीक्षण’ यानी एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने और इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

प्रमुख मांगें और आगे की प्रक्रिया
दायर की गई संयुक्त याचिका में एसआईआर से जुड़े सभी दस्तावेजों, बैठकों के रिकॉर्ड और डिजिटल लॉग को अदालत के सामने पेश करने का आग्रह किया गया है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि बिना उचित नोटिस और सुनवाई के किसी भी मतदाता का नाम सूची से न हटाया जाए। इस मामले पर अदालत में आगे सुनवाई होने की संभावना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

