भारत से मानसून के जाने के बाद अब देश के सामने एक नई जलवायु चुनौती उत्पन्न हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तेजी से सक्रिय हो रहा अल नीनो आने वाले दिनों में सुपर अल नीनो का रूप ले सकता है, जिससे आगामी सर्दियों के मौसम पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

सर्दियों के मिजाज पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर के महीने में अल नीनो अपनी सबसे ताकतवर स्थिति में पहुंच सकता है। इस स्थिति के कारण देश में इस बार सर्दियां सामान्य से अधिक गर्म महसूस हो सकती हैं और इसके साथ ही सर्दियों के दौरान होने वाली बारिश तथा पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव
दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से लगभग 13 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण फसलों को पहले ही नुकसान उठाना पड़ा है। अब सर्दियों के मौसम में कम ठंड और कम बर्फबारी का असर रबी फसलों की बुआई, मिट्टी की नमी और आगामी गर्मियों में पेयजल की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि इस परिस्थिति का असर वर्ष 2027 की शुरुआती गर्मियों के दौरान रिकॉर्ड तापमान, पानी की कमी और बिजली की बढ़ी हुई मांग के रूप में सामने आ सकता है।
वैश्विक स्तर पर भी दिखेगा असर
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आंकड़ों के अनुसार, यह मौजूदा स्थिति वर्ष 2015-16 के दौरान दर्ज किए गए अपने उच्चतम स्तर को भी पार कर सकती है। केवल भारत ही नहीं, बल्कि इस मजबूत होते अल नीनो की वजह से दुनिया भर के तापमान और बारिश के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव देखने की उम्मीद है।

