भारत में नेताओं और राजनीतिक हस्तियों के नाम पर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के नामकरण की परंपरा

भारत में नेताओं और राजनीतिक हस्तियों के नाम पर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के नामकरण की परंपरा

भारत में हवाई अड्डों, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों और कल्याणकारी योजनाओं का नामकरण राजनीतिक हस्तियों के नाम पर किए जाने का चलन पुराना है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस प्रकार की प्रथा के कड़े विरोधी थे और उन्होंने अपने जीवनकाल में ही इसके खिलाफ अपील की थी। इसके बावजूद, उनकी मृत्यु के पश्चात उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कई बड़ी परियोजनाओं और संस्थानों के नाम रखे गए।

भारत में नेताओं और राजनीतिक हस्तियों के नाम पर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के नामकरण की परंपरा

नेहरू का विरोध और नामकरण की शुरुआत

नवंबर 1957 में नेहरू ने एक औपचारिक बयान जारी कर लोगों से आग्रह किया था कि उनके जीवित रहते किसी भी सार्वजनिक संस्थान का नाम उनके नाम पर न रखा जाए। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सदस्यों को भी यही निर्देश दिए थे। हालांकि, समय के साथ इन अपीलों का असर कम होता गया। आरटीआई के आंकड़ों के अनुसार, नेहरू-गांधी परिवार के तीन प्रधानमंत्रियों के नाम पर सैकड़ों योजनाएं, संस्थान और बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं दर्ज हैं, जिनमें प्रमुख हवाई अड्डे और विश्वविद्यालय शामिल हैं.

अन्य नेताओं के नाम पर परियोजनाएं

यह प्रवृत्ति केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रही, बल्कि अन्य गैर-नेहरू-गांधी प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल और उनके बाद भी जारी रही। पी.वी. नरसिंह राव और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के नाम पर भी एक्सप्रेस-वे और विश्वविद्यालयों के नामकरण किए गए। इसी क्रम में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भी अहमदाबाद के क्रिकेट स्टेडियम और नोएडा-जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम रखा गया है। शुरुआती वर्षों में मुफ्त राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के नाम ‘प्रधानमंत्री’ उपसर्ग के साथ रखे गए थे और उनमें व्यक्तिगत नाम जोड़ने से परहेज किया गया था.

भारत में नेताओं और राजनीतिक हस्तियों के नाम पर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के नामकरण की परंपरा

अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण और तुलना

अन्य देशों की बात करें तो ब्रिटेन में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का नाम राजनीतिक नेताओं के नाम पर रखने की अनुमति नहीं दी जाती है, और वहां के संस्थान भौगोलिक स्थलों के आधार पर जाने जाते हैं। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ प्रमुख नेताओं के नाम पर हवाई अड्डे और केंद्र जरूर हैं, हालांकि ट्रम्प प्रशासन के दौरान इस तरह की प्रवृत्तियों में अलग बदलाव देखे गए हैं। भारतीय परिदृश्य में व्यक्ति-पूजा की संस्कृति और राजनीतिक रणनीतियों के चलते इस तरह के नामकरण का प्रभाव समय-समय पर दिखाई देता है.

Anju Kunwar

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