भारत को अराजकता से बचाएं: 400 से अधिक शिक्षाविदों ने विरोध प्रदर्शनों पर जताई चिंता

भारत को अराजकता से बचाएं: 400 से अधिक शिक्षाविदों ने विरोध प्रदर्शनों पर जताई चिंता

दुनियाभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े 400 से अधिक भारतीय मूल के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने ‘भारत को अराजकता से बचाएं’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में सड़क पर होने वाले उपद्रवी विरोध प्रदर्शनों के जरिए देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है।

भारत को अराजकता से बचाएं: 400 से अधिक शिक्षाविदों ने विरोध प्रदर्शनों पर जताई चिंता

हस्ताक्षर करने वाले ये शिक्षाविद् अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और सिंगापुर समेत 27 अलग-अलग देशों में निवास करते हैं और MIT, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, हार्वर्ड, प्रिंसटन तथा येल जैसे विश्वप्रसिद्ध संस्थानों से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि पिछले सात दशकों में भारतीय लोकतंत्र ने अपनी मजबूती का बार-बार परिचय दिया है और यहां की संस्थाओं ने हमेशा बेहतरीन ढंग से कार्य किया है।

संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव नतीजों पर सवाल

शिक्षाविदों ने इस बात पर चिंता जताई है कि मनमुताबिक चुनाव परिणाम न मिलने पर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का चलन बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा, अदालती फैसलों और न्यायिक स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाली टिप्पणियों के साथ-साथ सशस्त्र बलों को राजनीतिक विवादों में घसीटे जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।

डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों का हवाला

बयान में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की चेतावनी का जिक्र करते हुए कहा गया है कि संवैधानिक गणतंत्र को बचाए रखने के लिए नागरिकों को पूरी तरह संवैधानिक तरीकों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए और क्रांति के उन तरीकों को छोड़ना चाहिए जिन्हें ‘अराजकता का व्याकरण’ कहा गया था।

अंत में सभी सामाजिक और राजनीतिक समूहों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी चिंताओं को संवाद, चर्चा और लोकतांत्रिक दायरे में ही रखें तथा समाधान केवल देश के संस्थापकों द्वारा बनाई गई संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से ही तलाशें।

Anju Kunwar

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