झांसी में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान एक छात्र को आई आवास की समस्या से उपजे विचार ने एक सफल स्टार्टअप का रूप ले लिया है। इस अनूठे स्टार्टअप की शुरुआत मां और बेटे ने मिलकर की है, जिसे अब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी आर्थिक सहायता या ग्रांट प्रदान की गई है।

छात्रों की हॉस्टल खोजने की समस्या का समाधान
कॉलेज और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को अक्सर रहने के लिए उपयुक्त स्थान या हॉस्टल तलाशने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए झांसी के एक छात्र आर्यमन ने अपनी मां अनुराधा मेहरोत्रा के साथ मिलकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का विचार किया। इसी विचार के आधार पर ‘हॉस्टल्स नियर मी’ नामक स्टार्टअप की नींव रखी गई, जो विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से आसानी से हॉस्टल ढूंढने में सहायता प्रदान करता है।
स्टार्टअप में मां की दोहरी भूमिका
इस स्टार्टअप में अनुराधा मेहरोत्रा मुख्य परिचालन अधिकारी यानी सीओओ की भूमिका निभाती हैं। उन्होंने न केवल अपने बेटे को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, बल्कि विशेषज्ञ समिति के सामने अपने विचार को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। वर्तमान में यह कंपनी झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर के तहत पंजीकृत है और इसका विधिवत पंजीकरण वर्ष 2024 में कराया गया था।
कई शहरों में मिल रही है सेवाएं
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म वर्तमान में केवल झांसी तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ, जयपुर, ग्वालियर, इंदौर और मेरठ जैसे कई प्रमुख शहरों के छात्रों के लिए भी मददगार साबित हो रहा है। वर्ष 2025 में इस स्टार्टअप को ‘स्टार्ट इन यूपी’ योजना के तहत ग्रांट स्वीकृत हुआ और इसकी पहली किश्त भी मिल चुकी है। सरकारी सहायता मिलने के बाद अब इस प्लेटफॉर्म में नए फीचर्स जोड़ने और इसे जल्द ही एक मोबाइल ऐप के रूप में भी लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है।

