महिला स्वास्थ्य के लिए हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कड़ी में सोया साग को महिलाओं की सेहत के लिए बेहद गुणकारी बताया गया है। किशोरावस्था से लेकर अधिक उम्र तक की महिलाओं को अपने खानपान में सोया की हरी पत्तियों को जगह देनी चाहिए।

सोया साग खाने के स्वास्थ्य लाभ
सोया के पत्तों में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो महिलाओं और युवतियों में पीरियड्स के दौरान होने वाली खून की कमी से बचाव में मदद करती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद तत्व मांसपेशियों को राहत देने और पीरियड्स के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। जिन महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या इंसुलिन रेजिस्टेंस की परेशानी है, उनके लिए भी यह साग फायदेमंद माना गया है।
गर्भावस्था और पेरिमेनोपॉज में उपयोग
सोया साग में फोलिक एसिड भी प्रचुर मात्रा में होता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और फर्टिलिटी में सुधार के लिए उपयोगी है। शिशु को स्तनपान कराने वाली माताओं के शरीर की रिकवरी में भी यह मदद करता है। इसके साथ ही, पेरिमेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिलाओं के लिए यह एस्ट्रोजन हार्मोन के संतुलन और हड्डियों की मजबूती के लिहाज से लाभकारी होता है।
डाइट में शामिल करने के सही तरीके
- सप्ताह में कम से कम दो बार ताजे सोया साग का सेवन किया जा सकता है।
- आयरन को शरीर द्वारा बेहतर तरीके से सोखने के लिए पकाते समय इसमें थोड़ा नींबू का रस मिला सकते हैं।
- इसे मूंग दाल, चना दाल या बेसन जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर खाना फायदेमंद रहता है।
- ताजे पत्तों को चटनी या रायते में भी शामिल किया जा सकता है ताकि इसके पोषक तत्व नष्ट न हों।
पकाते समय इन बातों का रखें ध्यान
सोया साग को बहुत अधिक समय तक न पकाएं क्योंकि ज्यादा गर्मी मिलने से इसके जरूरी विटामिन कम होने लगते हैं। इसे काटने के बाद लंबे समय तक खुला न छोड़ें और इसकी मुलायम डंठलों को भी भोजन में उपयोग किया जा सकता है।

