चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर उठ रहे सवाल, प्रक्रिया की पारदर्शिता जरूरी

चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर उठ रहे सवाल, प्रक्रिया की पारदर्शिता जरूरी

भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों को लेकर इन दिनों कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। एक ओर जहां विपक्षी दल आयोग की विश्वसनीयता पर संदेह प्रकट कर रहे हैं, वहीं संस्था के भीतर से भी कामकाज को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं। चुनाव प्रक्रिया केवल सत्ता और विपक्ष के बीच का राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने से जुड़ी हुई है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर उठ रहे सवाल, प्रक्रिया की पारदर्शिता जरूरी

आंतरिक आपत्तियां और फैसलों पर सवाल

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन में से दो निर्वाचन आयुक्तों ने विभिन्न मौकों पर एसआईआर से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर पर नियंत्रण के केंद्रीकरण और कुछ अन्य निर्णय शामिल हैं। हालांकि आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर यह स्पष्ट किया है कि आंतरिक विचार-विमर्श सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और पिछले एक वर्ष के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे, लेकिन आलोचकों का मानना है कि केवल सर्वसम्मति का दावा करना पर्याप्त नहीं है।

पारदर्शिता और प्रेस कॉन्फ्रेंस की मांग

विशेषज्ञों का सुझाव है कि आयोग को खुलकर सामने आना चाहिए और तीनों आयुक्तों की मौजूदगी में एक प्रेस वार्ता आयोजित करनी चाहिए। जनता और लोकतंत्र के हित में यह आवश्यक है कि उठाए गए सभी सवालों के स्पष्ट जवाब दिए जाएं और यह बताया जाए कि आंतरिक आपत्तियों का समाधान किस प्रकार किया गया। संस्थागत ईमानदारी का केवल दावा करने के बजाय उसे सार्वजनिक रूप से साबित करना भी जरूरी होता है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर उठ रहे सवाल, प्रक्रिया की पारदर्शिता जरूरी

नियुक्ति प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की भूमिका

चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए। यह केवल किसी एक दल या विपक्ष का मामला नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से सभी राजनीतिक दलों और देश के हित में है कि चुनाव आयोग पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र दिखाई दे। इसके साथ ही, निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी विचार किया जाना चाहिए ताकि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।

Anju Kunwar

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