बचपन में हम सभी ने अपने परिवार के साथ भोजन करते समय या किसी से मदद मिलने पर आभार जताना सीखा था। समय के साथ क्या हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से ये सहज शब्द गायब होने लगे हैं? आज की इस आधुनिक और तेज रफ्तार दुनिया में ‘थैंक यू’ और ‘प्लीज’ जैसे सरल शब्दों का चलन कम होता जा रहा है।

अच्छे शिष्टाचार दुनिया की सीक्रेट चाबियां
कई विशेषज्ञों और लेखकों ने अपने विचारों में इस बात पर जोर दिया है कि शिष्टाचार केवल सामाजिक नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि यह अच्छे रिश्ते बनाने का माध्यम है। जब हम किसी के प्रयास के लिए धन्यवाद कहते हैं, तो हम केवल उसके काम को ही नहीं बल्कि उस व्यक्ति को भी स्वीकार करते हैं। इससे सामने वाले को यह अहसास होता है कि उसका योगदान समाज और हमारे लिए मायने रखता है।
छोटे जेस्चर्स जो जीवन को बनाते हैं आसान
दैनिक जीवन की कई ऐसी स्थितियां होती हैं जहां हमारी थोड़ी सी विनम्रता बहुत बड़ा फर्क ला सकती है। सुरक्षा गार्ड, हाउसकीपिंग स्टाफ, सहकर्मियों या किसी अनजान व्यक्ति द्वारा की गई छोटी सी मदद को स्वीकार करना हमारी जिम्मेदारी है। गलती होने पर माफी मांगना और बिना किसी की बात काटे उसे सुनना अच्छे मैनर्स का हिस्सा है। इन छोटी बातों में कुछ खर्च नहीं होता, लेकिन यह किसी का भी दिन बना सकती हैं।

असली परीक्षा और समुदाय की जिम्मेदारी
मैनर्स की वास्तविक परीक्षा यह नहीं है कि हम किसी रसूखदार व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, बल्कि यह है कि हम उस व्यक्ति के प्रति कैसे पेश आते हैं जिससे हमें किसी प्रकार के लाभ की उम्मीद नहीं होती। एक-दूसरे के प्रति आभार जताना एक समुदाय में रहने वाले इंसानों की बुनियादी जिम्मेदारी है। दयालुता भरे कार्यों को हल्के में न लेना और दूसरों के प्रयासों को स्वीकार करना ही एक सभ्य समाज की पहचान है।

