केरलम के कोच्चि में एक न्यायाधीश के 17 वर्षीय नाबालिग बेटे द्वारा मर्सिडीज-बेंज कार से एक स्कूटर को टक्कर मारने का मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई। इस दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में लीपापोती करने का गंभीर आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।

हादसे का विवरण और पहली बार कार चलाने का झूठा दावा
यह दुखद दुर्घटना रविवार तड़के करीब 2:20 बजे हुई, जब तेज रफ्तार लग्जरी कार ने दोपहिया वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त कार की रफ्तार लगभग 104 किलोमीटर प्रति घंटा थी। दुर्घटना के तुरंत बाद नाबालिग ने यह दावा किया था कि उसने पहली बार गाड़ी निकाली थी और यूट्यूब वीडियो देखकर ड्राइविंग सीखी थी। हालांकि, पुलिस सूत्रों और उसके सोशल मीडिया अकाउंट की जांच से यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। उसके अकाउंट पर पहले कई ऐसे वीडियो मौजूद थे जिनमें वह उसी मर्सिडीज कार को 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाते हुए नजर आता था, जिन्हें घटना के तुरंत बाद डिलीट कर दिया गया।
जमानत मिलने पर भड़का पीड़ित परिवार
हादसे में जान गंवाने वाला व्यक्ति पिछले 30 वर्षों से स्ट्रीट फूड की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था और वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। घटना के बाद आरोपी नाबालिग को हिरासत में लिया गया, लेकिन उसे तुरंत ही जमानत पर रिहा कर दिया गया। इस बात से गुस्साए परिजनों ने पुलिस पर सबूत मिटाने और मामले को दबाने के आरोप लगाए। बाद में पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 सहित अन्य कड़ी धाराएं जोड़ी हैं।
कार में अन्य लोगों के मौजूद होने का दावा
मृतक के बेटे और बेटी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में न्यायाधीश और पुलिस मिलकर आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार, एक चश्मदीद ने उन्हें बताया कि दुर्घटना के समय कार में चार लोग सवार थे, जिनमें से तीन टक्कर के तुरंत बाद मौके से फरार हो गए। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि कार के पंजीकृत मालिक होने के नाते उस न्यायाधीश को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया जाए और निष्पक्ष जांच की जाए।

