पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले के पांडवेश्वर स्थित एक कोयला खदान में सोमवार को एक बड़ी दुर्घटना सामने आई है। यहां लिफ्ट प्रणाली में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण लगभग 12 मजदूर जमीन से 50 मीटर की गहराई में फंस गए हैं। यह पूरी घटना ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) द्वारा संचालित कुमरडीही अंडरग्राउंड कोल माइंड में हुई है। जानकारी के अनुसार, मजदूरों को ऊपर-नीचे ले जाने वाले पिंजरे की मशीनरी से जुड़ी रस्सी पुली ड्रम से फिसल गई, जिसके कारण लिफ्ट की आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई और मजदूर खदान के अंदर ही फंसकर रह गए।

युद्ध स्तर पर जारी है बचाव अभियान
घटना की सूचना मिलते ही खनन अधिकारियों ने बिना देरी किए बचाव अभियान शुरू कर दिया। खदान के अंदर फंसे मजदूरों की स्थिति को लेकर चिंता लगातार बनी हुई थी, क्योंकि उन्हें अंदर फंसे हुए लंबा समय बीत चुका था। राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है। पांडवेश्वर से बीजेपी विधायक जितेन्द्र तिवारी ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों का जायजा लिया। उनके अनुसार, अंदर फंसे हुए कामगारों से संपर्क स्थापित कर लिया गया है और उन्हें सुरक्षित रूप से पानी तथा भोजन भी मुहैया कराया गया है। राज्य सरकार को स्थिति से अवगत कराते हुए बताया गया है कि बचाव दल लगातार काम में जुटे हैं ताकि सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
सुरक्षा मानकों और रख-रखाव पर गंभीर सवाल
इस अप्रिय दुर्घटना ने एक बार फिर से खनन अधिकारियों की सुरक्षा प्रणाली और मशीनों के रख-रखाव के तौर-तरीकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों और खदान के कामगारों का कहना है कि कुमरडीही कोलियरी में लिफ्ट से जुड़े हादसे लगातार होते रहे हैं। कभी तकनीकी खराबी की वजह से लिफ्ट का बीच में ही फंस जाना तो कभी लिफ्ट की केबल टूटने जैसी घटनाएं यहां आम बात बन चुकी हैं। बार-बार इस प्रकार की घटनाएं होने के बावजूद कोई पुख्ता और स्थायी समाधान न निकाले जाने पर कई मजदूरों ने नाराजगी जताई है। खदान के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें लगातार अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है।
खदान से जुड़ी पिछली दुर्घटनाएं
ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के विभिन्न क्षेत्रों में पहले भी इस तरह के कई बड़े हादसे हो चुके हैं। इस साल की शुरुआत में सिदुली कोलियरी में पानी भरने के कारण हुए एयर ब्लास्ट में दो मजदूर फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया था। इसके अलावा पिछले साल मई के महीने में पारसिया कोलियरी में हुए एक केव-इन और एयर ब्लास्ट की घटना में एक मजदूर की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। लगभग दो साल पहले ईसीएल की एक अन्य खदान में पहिए की मरम्मत के दौरान बड़ा हादसा हुआ था, जहां दो मजदूर दो हजार फीट नीचे गिरकर अपनी जान गंवा बैठे थे। इसके अलावा 2023 में केंडा-जामबाद खदान में हुए हादसे में एक सुपरवाइजर समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि एक अन्य कोयला खदान में मीथेन गैस और पानी भरने के कारण अफरा-तफरी मच गई थी, हालांकि उसमें दो मजदूर बाल-बाल बच गए थे। ताजा घटना के बाद से ही फंसे हुए मजदूरों के परिवार वाले और उनके साथी खदान के बाहर बड़ी बेसब्री से राहत कार्यों के पूरा होने और सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

