केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इंडिया एक्जिम बैंक के साथ हुए लगभग 1 करोड़ डॉलर के कथित धोखाधड़ी मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले में एक यूके-आधारित कंपनी, उसके पूर्व निदेशकों और अन्य सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। बैंक के एक अधिकारी की शिकायत के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, इंडिया एक्जिम बैंक के सहायक महाप्रबंधक जी. सेल्वा कुमार ने बैंक के साथ धोखाधड़ी और वित्तीय नुकसान पहुंचाने की शिकायत दर्ज कराई थी। यूके स्थित कंपनी ‘हंजर बायोटेक (एरिथ) लिमिटेड’ ने यूनाइटेड किंगडम में अपनी रीसाइक्लिंग परियोजना के लिए मशीनरी खरीदने के वास्ते ऋण का अनुरोध किया था। परियोजना की कुल लागत 1.59 करोड़ डॉलर आंकी गई थी, जिसमें से प्रमोटरों का अंशदान 59 लाख डॉलर और बाकी राशि बैंक के ऋण से पूरी की जानी थी।
ऋण मंजूरी और विसंगतियां
दस्तावेजों के मुताबिक, बैंक की मुंबई स्थित कार्यकारी समिति ने वर्ष 2012 में 1 करोड़ डॉलर के टर्म लोन को मंजूरी दी थी। हालांकि, आरोप है कि परियोजना के लिए कभी मशीनरी की आपूर्ति नहीं की गई। इसके विपरीत, मशीनरी खरीद के लिए मिले अग्रिम पैसों को कथित तौर पर अन्य संबंधित पक्षों और सहयोगी कंपनियों को ऋण के रूप में डायवर्ट कर दिया गया।
- प्राथमिकी में हंजर बायोटेक (एरिथ) लिमिटेड को आरोपी बनाया गया है, जो अब भंग (डिफंक्ट) हो चुकी है।
- नवी इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और ह्यूमे सिंथेसिस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम भी इसमें शामिल हैं।
- पूरा 1 करोड़ डॉलर का ऋण कथित तौर पर गलत तरीके से निकाल लिया गया।
खाता एनपीए घोषित
आरबीआई के दिशा-निर्देशों के तहत 29 सितंबर 2014 को जब यह ऋण खाता गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) बना, तब बकाया राशि लगभग 63 करोड़ रुपये (1 करोड़ डॉलर) थी। बाद में इस खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया गया। अब सीबीआई अज्ञात लोक सेवकों और अन्य आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।

