वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे: मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में पांचों आरोपी अदालत से बरी

वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे: मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में पांचों आरोपी अदालत से बरी

वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान एक धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ और आगजनी से जुड़े एक पुराने मामले में स्थानीय अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए पांचों आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने यह कदम तब उठाया जब अभियोजन पक्ष इन लोगों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इस फैसले से कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को राहत मिली है, जो पिछले कई वर्षों से इस मामले का सामना कर रहे थे।

वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे: मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में पांचों आरोपी अदालत से बरी

अदालत का फैसला और आरोपियों की रिहाई

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाया। उन्होंने अनुज, अरविंद, नीतू, अंकित और राजकुमार नाम के पांचों आरोपियों को बरी कर दिया। सरकारी वकील नरेंद्र शर्मा ने इस बात की जानकारी दी। अदालत ने अपने अवलोकन में पाया कि अभियोजन पक्ष के पास ऐसे कोई ठोस और पर्याप्त सबूत नहीं थे, जो यह साबित कर सकें कि ये सभी लोग इस अपराध में शामिल थे। सबूतों की कमी के कारण अदालत के सामने आरोपियों को बरी करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।

घटना का विवरण और शिकायत

यह पूरी घटना 8 सितंबर 2013 की है, जो भोराकलां पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले मुठभर गांव में हुई थी। इस मामले में शाहबुद्दीन नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उस दौरान पचास से अधिक लोगों की भीड़ ने गांव में स्थित एक मस्जिद को निशाना बनाया था। भीड़ पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने न केवल मस्जिद में जमकर तोड़फोड़ की, बल्कि उसे आग के हवाले भी कर दिया। इसके अलावा, धार्मिक स्थल के भीतर दान या संग्रह के रूप में रखी गई लगभग एक लाख रुपये नकद राशि भी लूट ली गई थी।

विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया

शिकायत मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) ने इस घटना की अपने स्तर पर विस्तृत जांच की थी। लंबी जांच-पड़ताल और साक्ष्य संकलन के बाद विशेष जांच दल ने अदालत में इन पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अदालत में सुनवाई का दौर शुरू हुआ, जिसमें गवाहों और सबूतों का परीक्षण किया गया। अंततः, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष वे सभी तथ्य और सबूत पेश करने में असमर्थ रहा, जो इन पांचों व्यक्तियों को दोषी ठहराने के लिए आवश्यक होते हैं। इसी आधार पर न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

Anju Kunwar

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