यमुनोत्री धाम में रिकॉर्ड आय और श्रद्धालुओं की आमद, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने की उठी मांग

यमुनोत्री धाम में रिकॉर्ड आय और श्रद्धालुओं की आमद, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने की उठी मांग

उत्तराखंड के प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम में इस यात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है, जिससे मंदिर समिति की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, रिकॉर्ड संख्या में भक्तों के पहुंचने और लाखों की आमदनी के बावजूद यात्रा मार्ग की खस्ताहाली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

यमुनोत्री धाम में रिकॉर्ड आय और श्रद्धालुओं की आमद, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने की उठी मांग

बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर समिति की आय

मंदिर समिति के पदाधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सीजन में अब तक लगभग 7.20 लाख श्रद्धालु यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं। दानपात्र, रसीद बुक और अन्य माध्यमों से प्राप्त कुल आय करीब 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे यात्रा का समय आगे बढ़ेगा, श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। इस रिकॉर्ड आमद से स्थानीय कारोबारियों और दुकानदारों में भी खुशी का माहौल है, क्योंकि इससे क्षेत्र की आजीविका को बढ़ावा मिल रहा है।

जानकीचट्टी से यमुनोत्री पैदल मार्ग पर दबाव

भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक जाने वाले पैदल मार्ग पर भारी दबाव बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या बढ़ती आय के अनुपात में यात्रियों के लिए सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। रास्ते में विश्राम स्थल, पीने का पानी, शौचालय, साफ-सफाई और चिकित्सा सहायता जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार यात्रियों को लंबी पैदल यात्रा के दौरान पेश आने वाली परेशानियों से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है।

यमुनोत्री धाम में रिकॉर्ड आय और श्रद्धालुओं की आमद, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने की उठी मांग

यमुनोत्री हाईवे के डेंजर जोन बने चिंता का विषय

पैदल मार्ग के अलावा यमुनोत्री हाईवे की स्थिति भी यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है। मार्ग के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कुछ क्षेत्र डेंजर जोन में तब्दील हो गए हैं। यात्रा सीजन में वाहनों और यात्रियों का दबाव अधिक होने के कारण इन संवेदनशील स्थानों पर हादसों का खतरा बना रहता है।

बेहतर प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना की जरूरत

जानकारों का मानना है कि केवल श्रद्धालुओं की संख्या और रिकॉर्ड आय का आंकड़ा ही सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति को यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन और आपातकालीन प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में आस्था की यह यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके।

Anju Kunwar

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