रिश्तों और प्यार में ‘ना’ कहने की हिम्मत क्यों है जरूरी

रिश्तों और प्यार में ‘ना’ कहने की हिम्मत क्यों है जरूरी

हाल ही में सामने आए एक मामले में सोशल मीडिया पर लगातार अपनी संपत्ति और जीवनशैली का प्रदर्शन करने के बाद एक परिवार को भारी चोरी का सामना करना पड़ा। इस प्रकार की घटनाएं केवल दिखावे के दुष्परिणामों को ही नहीं दर्शातीं, बल्कि यह भी सिखाती हैं कि अतिरेक और भौतिकता का प्रदर्शन किस तरह नुकसानदेह हो सकता है। प्रख्यात उपन्यासों और जीवन के अनुभवों से यह प्रेरणा मिलती है कि प्रेम और रिश्तों में भी सीमाओं का होना बहुत जरूरी है।

रिश्तों और प्यार में ‘ना’ कहने की हिम्मत क्यों है जरूरी

नि:स्वार्थ समर्पण की भी होती है एक सीमा

इतिहास और साहित्य में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जो यह समझाते हैं कि सब कुछ कुर्बान कर देना हमेशा सकारात्मक परिणाम नहीं लाता। प्रसिद्ध फ्रेंच उपन्यास ‘फादर गोरियो’ की कहानी एक ऐसे पिता की है जो अपनी बेटियों की हर मांग पूरी करने के लिए अपनी पूरी संपत्ति लुटा देते हैं। इसके बावजूद उनकी बेटियां स्वार्थी होती चली गईं और अंततः उस पिता को बेहद गरीबी में जीवन बिताना पड़ा। इस तरह के प्रसंग यह सीख देते हैं कि बिना किसी सीमा के किया गया समर्पण अपनों के भीतर लालच और गलत प्रवृत्तियों को भी बढ़ावा दे सकता है।

भौतिकता की दौड़ और रिश्तों की वास्तविक परख

आज की इस दिखावे से भरी दुनिया में व्यक्ति की पहचान अक्सर उसकी संपत्ति से जोड़ी जाने लगी है। ऐसे माहौल में यह आवश्यक है कि मानवीय संवेदनाएं और नैतिकता जीवित रहें। माता-पिता या अपनों के प्रति असीम प्रेम का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि उनकी हर गलत बात या दिखावे की आदत को बढ़ावा दिया जाए। यदि किसी अपने को सही रास्ते पर रखना है, तो कभी-कभी कड़ा रुख अपनाना पड़ सकता है।

रिश्तों और प्यार में ‘ना’ कहने की हिम्मत क्यों है जरूरी

निष्कर्ष

जीवन का मूल मंत्र यही है कि सच्चा प्यार और आत्मिक सुख धन-दौलत या दिखावे से नहीं खरीदे जा सकते। प्यार के नाम पर अपनी गरिमा या विवेक को ताक पर रख देना किसी के लिए भी हितकारी नहीं है। अपने प्रियजनों को बुरी आदतों और लालच से बचाने के लिए समय आने पर ‘ना’ कह पाने का साहस होना अत्यंत आवश्यक है।

Anju Kunwar

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