मुजफ्फरनगर कांड-94 के 32 साल पूरे होने के अवसर पर उत्तराखंड के विभिन्न संगठनों ने नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर काला दिवस मनाने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद उन्होंने मजबूरन प्रेस क्लब में इकट्ठा होकर शहीदों को याद किया। इस दौरान राष्ट्रपति को एक रोषयुक्त ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें इस जघन्य कांड के दोषियों को तत्काल सजा देने की मांग की गई।

जंतर-मंतर पर अनुमति न मिलने पर जताया रोष
समिति के संयोजक देवसिंह रावत के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों का कहना था कि राष्ट्रीय राजधानी के धरना स्थल पर कार्यक्रम की अनुमति न देना लोकतंत्र पर हमला है। इसके बावजूद उत्तराखंड एकता मंच, उत्तराखंड जनमोर्चा, उत्तराखंड लोकमंच और उत्तराखंड क्रांतिदल सहित कई प्रमुख संगठनों के सदस्यों ने एकजुट होकर बलिदानियों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
दोषियों को सजा न मिलने से लोगों में है गहरा असंतोष
वक्ताओं ने कहा कि तीन दशक बीत जाने के बाद भी इस मामले के गुनाहगारों को दंडित करने के बजाय उन्हें कथित तौर पर संरक्षण और पदोन्नति दी गई है, जो बेहद निराशाजनक है। सभा में मौजूद लोगों ने केंद्र और विभिन्न राज्यों की सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को याद किया और न्याय व्यवस्था से इस मामले में सख्त कदम उठाने की अपील की।

