प्रोजेक्ट्स की सफलता के लिए सिर्फ एआई काफी नहीं, बेंगलुरु में उद्योग दिग्गजों ने दिए अहम सुझाव

प्रोजेक्ट्स की सफलता के लिए सिर्फ एआई काफी नहीं, बेंगलुरु में उद्योग दिग्गजों ने दिए अहम सुझाव

बेंगलुरु के भारतीय सिटी में हाल ही में 18वें प्रोजेक्ट मैनेजमेंट साउथ एशिया कॉन्फ्रेंस (PMSAC) 2026 का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘मोर, टूगेदर: फ्यूचर-रेडी इन द एज ऑफ एआई’ था। इस कार्यक्रम में दक्षिण एशिया के विभिन्न क्षेत्रों से 850 से अधिक प्रतिनिधियों और 20 से ज्यादा वक्ताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, उद्योग, प्रौद्योगिकी और नीति निर्माण से जुड़े लोग शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत के प्रमुख दिग्गजों ने स्पष्ट किया कि केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के भरोसे बड़ी परियोजनाओं और व्यवसायों में सफलता हासिल नहीं की जा सकती।

प्रोजेक्ट्स की सफलता के लिए सिर्फ एआई काफी नहीं, बेंगलुरु में उद्योग दिग्गजों ने दिए अहम सुझाव

मानवीय निर्णय और तकनीक का सही संयोजन

सम्मेलन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि हालांकि एआई नौकरियों, व्यावसायिक मॉडलों और प्रोजेक्ट डिलीवरी के तौर-तरीकों को तेजी से बदल रहा है, लेकिन संगठनों को इसके सकारात्मक और सार्थक परिणाम पाने के लिए तकनीक के साथ मानवीय निर्णय, नेतृत्व और मजबूत क्रियान्वयन को मिलाना होगा। वक्ताओं का मानना था कि किसी भी प्रोजेक्ट के सफल होने में केवल तकनीक की भूमिका नहीं होती, बल्कि रणनीतिक सोच, मानवीय निर्णय, अनुकूलन क्षमता, आपसी सहयोग और सही निष्पादन का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जैसे-जैसे कार्यस्थलों पर एआई का एकीकरण बढ़ रहा है, संगठनों को इस बात पर लगातार पुनर्विचार करने की आवश्यकता है कि वे अपनी परियोजनाओं की योजना कैसे बनाते हैं, उन्हें लागू कैसे करते हैं और उनका मूल्यांकन किस प्रकार किया जाता है।

भारत का तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र और विकास

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (PMI) साउथ एशिया के प्रबंध निदेशक अमित गोयल ने कहा कि भारत का मजबूत तकनीक पारिस्थितिकी तंत्र और उभरती हुई तकनीकों को अपनाने तथा उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने की क्षमता देश को विकास के अगले चरण की ओर ले जाने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि, उन्होंने मैकिंजी 2025 स्टेट ऑफ एआई रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि केवल 39 प्रतिशत संगठनों ने ही एआई से अपने उद्यम स्तर पर ईबीआईटी प्रभाव की पुष्टि की है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई के इस दौर में प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संगठन किस प्रकार तकनीकी फायदों को मानवीय समझ, नेतृत्व कौशल और सटीक क्रियान्वयन के साथ जोड़ते हैं। यह सम्मेलन इसी बात का मंच प्रदान करता है कि संगठन अपनी एआई से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को वास्तविक और सार्थक परिणामों में कैसे बदल सकते हैं।

विभिन्न सत्र और प्रमुख वक्ता

इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। इनमें एमिटी यूनिवर्सिटी ऑनलाइन के अजीत चौहान, किंड्रिल के रवि कुमार दीक्षित, निरामाई हेल्थ एनालिटिक्स की डॉ. गीता मंजूनाथ, नोवो नॉर्डिस्क के जॉन डाउबर, आईबीएम कंसल्टिंग की उषा श्रीकांत और ईएक्सएल के सुमित तनेजा शामिल रहे। उनके सत्रों में बड़े पैमाने पर होने वाले बदलावों, एआई के लिए संगठनात्मक तैयारी और तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में नेतृत्व की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से चर्चा की गई।

इसके अलावा, प्रसिद्ध लेखक, स्तंभकार और मोटिवेशनल स्पीकर चेतन भगत ने भी पेशेवर जीवन की बदलती माँगों, बदलावों से निपटने और नेतृत्व के तौर-तरीकों पर मुख्य भाषण दिया। प्रौद्योगिकी, एडटेक, कंसल्टिंग और एंटरप्राइज़ सॉल्यूशन से जुड़े अन्य वक्ताओं ने भी बढ़ती प्रोजेक्ट जटिलताओं और कार्यबल की बदलती अपेक्षाओं पर अपने विचार साझा किए।

Anju Kunwar

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