यदि आपका बच्चा स्कूल जाने के नाम पर रोज रोता है, तो इसे केवल उसकी जिद मानकर डांटने या मारने के बजाय उसके मन की बात को समझने का प्रयास करना चाहिए। कई बार बच्चों के इस व्यवहार के पीछे घर से दूर होने का डर या नया माहौल जैसी कई वजहें होती हैं। माता-पिता को इन कारणों को समझकर बच्चों को प्यार से संभालना चाहिए।

बच्चों के स्कूल जाने पर रोने के मुख्य कारण
छोटे बच्चों के स्कूल जाने से कतराने या रोने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। इनमें से चार प्रमुख वजहें निम्नलिखित हैं:
- माता-पिता से अलगाव का डर: तीन साल तक के बच्चों को अपने परिवार के साथ रहना सुरक्षित लगता है। जब उन्हें माता-पिता से दूर होना पड़ता है, तो वे घबरा जाते हैं।
- नया माहौल: घर का जाना-पहचाना वातावरण छोड़कर स्कूल की नई कक्षा, नए शिक्षक और सहपाठियों के बीच खुद को ढालना बच्चे के लिए कठिन हो सकता है।
- दूसरों से घुलने-मिलنے में कठिनाई: कुछ बच्चों को नए साथियों के साथ दोस्त बनाने और घुलने-मिलने में थोड़ा अधिक समय लगता है।
- किसी बात का भय: कभी-कभी बच्चा विद्यालय में किसी गतिविधि, शिक्षक या साथी के व्यवहार से परेशान या भयभीत हो सकता है, जिसे वह स्पष्ट रूप से बता नहीं पाता।
बच्चों को शांत करने और सहज बनाने के तरीके
यदि आपका बच्चा विद्यालय जाते वक्त रोता है, तो आप कुछ आसान तरीकों को अपना सकते हैं:
- बच्चे को डांटने के बजाय प्यार से समझाएं कि स्कूल में वह नई चीजें सीख सकता है।
- सोने और जागने का एक निश्चित रूटीन बनाएं ताकि सुबह की जल्दबाजी और घबराहट कम हो सके।
- स्कूल छोड़ते समय लंबी विदाई से बचें; बच्चे को प्यार से गले लगाएं और शिक्षक के पास छोड़कर सहजता से वापस आ जाएं।
- शिक्षक से नियमित बातचीत करें और बच्चे की छोटी-छोटी कोशिशों की सराहना करें।

