क्या भारत वाकई एक ‘सॉफ्ट स्टेट’ है? जानिए इतिहास और तथ्यों से जुड़ी अहम बातें

क्या भारत वाकई एक 'सॉफ्ट स्टेट' है? जानिए इतिहास और तथ्यों से जुड़ी अहम बातें

क्या भारत एक ‘सॉफ्ट स्टेट’ रहा है और क्या उसने अपने दुश्मनों को हमेशा फायदा उठाने दिया? अक्सर यह सवाल उठाया जाता है कि काश देश ने शुरुआती समय में अलग रास्ते चुने होते। हालांकि, इतिहास और तथ्य इसके बिल्कुल विपरीत बात बयां करते हैं। अपनी आर्थिक और सैन्य सीमाओं के बावजूद, आधुनिक भारत अपनी क्षमता से कहीं अधिक बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहा है।

क्या भारत वाकई एक 'सॉफ्ट स्टेट' है? जानिए इतिहास और तथ्यों से जुड़ी अहम बातें

आजादी के तुरंत बाद अक्टूबर 1947 में कश्मीर के हालात बेहद नाज़ुक होने पर सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया था। महात्मा गांधी ने भी ब्रिगेडियर लायनेल प्रोतीप सेन से मुलाकात के दौरान कहा था कि बेकसूर लोगों की रक्षा और उनकी जायदाद बचाने के लिए हर संभव साधन का पूरा इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, पंडित जवाहरलाल नेहरू के 17 साल के कार्यकाल के दौरान भी देश ने कई मोर्चों पर कड़े फैसले लिए।

विभिन्न प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में सुरक्षा और कड़े फैसले

नेहरू के कार्यकाल में केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि सैन्य ताकत का भी भरपूर इस्तेमाल किया गया। भारत ने पाकिस्तान का मुकाबला करने के साथ-साथ हैदराबाद के निजाम और रजाकारों की चुनौती को समाप्त किया और गोवा को पुर्तगाली कब्जे से आजाद कराया। इसके अलावा, पूर्वोत्तर में नगा बगावत से निपटने के लिए सेना भेजने और अफस्पा लागू करने में भी कोई झिझक नहीं दिखाई गई थी।

लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के इरादों को हमेशा के लिए नाकाम कर दिया, जबकि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में 1971 की ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी गई। मोरारजी देसाई के छोटे से कार्यकाल में भी वायुसेना के लिए आधुनिक जैगुआर विमानों की खरीद के ऑर्डर दिए गए थे। राजीव गांधी के दौर में रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की गई और श्रीलंका तथा मालदीव में सैन्य शक्ति का पहली बार विदेशी धरती पर इस्तेमाल हुआ।

क्या भारत वाकई एक 'सॉफ्ट स्टेट' है? जानिए इतिहास और तथ्यों से जुड़ी अहम बातें

आधुनिक समय और सख्त रुख

बाद के दशकों में भी विभिन्न सरकारों ने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा। नरसिंह राव के कार्यकाल में पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद का सफाया किया गया और अमेरिका के साथ रिश्ते बेहतर किए गए। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों ने पोकरण परमाणु परीक्षण और परमाणु संधि जैसे बड़े और जोखिम भरे कदम उठाए।

नरेंद्र मोदी के दौर में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और अन्य सैन्य अभियानों के जरिए देश के सख्त तेवर दुनिया के सामने आए। साथ ही, देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माने जाने वाले हथियारबंद माओवाद के खात्मा करने की दिशा में भी सफलता हासिल हुई। इन तमाम ऐतिहासिक उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि भारत कभी भी ‘सॉफ्ट स्टेट’ की श्रेणी में नहीं रहा है।

Anju Kunwar

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