मानव आचरण और स्वभाव में सुधार लाने के तरीकों पर अक्सर बहस होती रहती है कि लोगों को कैसे बदला जाए। क्या किसी भी व्यवस्था में नियमों का पालन करवाने के लिए कड़े दंड का भय दिखाना जरूरी है या फिर छोटे-छोटे प्रोत्साहन देकर उन्हें सही रास्ते पर लाया जा सकता है? इस विषय पर अलग-अलग उदाहरणों के जरिए विचार किया जाता है कि कौन सा तरीका ज्यादा बेहतर परिणाम देता है।

कानून और नियमों के पालन में डर की भूमिका
हाल ही में अमेरिका के इलिनॉय राज्य में कार्यवाहक लेजिस्लेटिव इंस्पेक्टर जनरल डेविड ई. रिस्ली का एक वीडियो सामने आया था। उनके विभाग का मुख्य कार्य भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना है। अपने स्टाफ को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत आचरण करने वालों की जानकारी किसी न किसी माध्यम से उन तक पहुंच ही जाती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि नियमों के उल्लंघन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की कार्यप्रणाली में पकड़े जाने और परिणाम भुगतने का डर मुख्य रूप से काम करता है, जो लोगों को गलत काम करने से रोकता है।
भोजन की बर्बादी रोकने का अनोखा तरीका और इनाम
दूसरी तरफ, यदि सकारात्मक आदतों को बढ़ावा देने की बात हो तो इनाम या छूट का तरीका भी काफी असरदार साबित होता है। पुणे के एक प्रसिद्ध महाराष्ट्रीयन डाइनिंग हॉल का उदाहरण इसके लिए बिल्कुल सटीक बैठता है। इस भोजनालय में ग्राहकों को भोजन की बर्बादी रोकने के लिए एक खास नीति अपनाई जाती है। जो ग्राहक अपनी प्लेट का सारा खाना पूरी तरह खत्म कर लेता है, उसे बिल में बीस रुपए की छूट दी जाती है। हैरानी की बात यह है कि तीन सौ रुपए तक का भोजन करने वाले लोग भी उस बीस रुपए के इनाम के लालच में अपनी प्लेट में एक भी दाना नहीं छोड़ते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रोत्साहन लोगों को स्वेच्छा से सही काम करने के लिए प्रेरित करता है।

नतीजा और निष्कर्ष
इन दोनों मिसालों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि दोनों ही रणनीतियां अपनी जगह काम करती हैं। जब किसी को जानबूझकर किए गए गंभीर उल्लंघनों से रोकना हो, तब सजा या जांच का डर जरूरी हो सकता है। हालांकि, यदि उद्देश्य समाज या लोगों के बीच अच्छी आदतें विकसित करना हो, तो इनाम का तरीका ज्यादा सुखद और प्रभावी साबित होता है। डर लोगों को तात्कालिक रूप से आज्ञाकारी तो बना सकता है, लेकिन किसी सकारात्मक बदलाव के लिए उन्हें अंदर से प्रेरित करने का काम प्रोत्साहन या इनाम ही करता है।

