उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन की ओर से बुलाई गई हड़ताल का सीधा असर रुड़की डिपो की बस सेवाओं पर पड़ा है, जिससे सफर करने वाले आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डिपो के कई चालक और परिचालक इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देहरादून पहुंचे थे, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर बसों के पहिये थम गए। परिवहन सेवाओं के इस तरह अचानक प्रभावित होने से आम नागरिकों और यात्रियों की दिनचर्या बुरी तरह गड़बड़ा गई और उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अनिश्चितता का सामना करना पड़ा।

चालकों और परिचालकों की कमी से ठप रहा संचालन
कर्मचारियों के देहरादून जाने के बाद डिपो में स्टाफ की भारी कमी हो गई। इस वजह से कई रूटों पर निर्धारित बसों का संचालन नहीं किया जा सका। अचानक बसें रद्द होने या उनके समय पर न मिलने से बस अड्डे पर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। डिपो प्रबंधन के पास पर्याप्त कर्मचारी न होने के कारण स्थिति को तुरंत संभाल पाना मुश्किल साबित हुआ, जिससे यात्रियों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गईं।
दिल्ली जाने वाले यात्रियों को उठानी पड़ी सबसे ज्यादा फजीहत
बस सेवा बाधित होने के कारण सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हुई जिन्हें राजधानी दिल्ली की ओर जाना था। दिल्ली रूट पर चलने वाली बसों की संख्या कम होने या समय पर उपलब्ध न होने के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। तय समय पर वाहन न मिलने के कारण लोग बस अड्डे पर ही परेशान होते नजर आए और उन्हें अपने जरूरी कार्यों के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि उन्हें इस हड़ताल की पहले से कोई पुख्ता जानकारी नहीं थी, जिससे उनकी परेशानी और अधिक बढ़ गई।
कर्मचारियों की मांगें और आंदोलन का दायरा
बताया गया है कि उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन द्वारा विभिन्न सूत्रीय मांगों को लेकर यह विरोध प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। इस आंदोलन का दायरा देहरादून के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी फैल गया, जिसका प्रत्यक्ष असर रुड़की डिपो की कार्यप्रणाली पर भी साफ तौर पर दिखाई दिया। हालांकि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर मुखर हैं, लेकिन इसका खामियाजा रोजाना सफर करने वाले आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। बस अड्डों पर फंसे यात्री स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते रहे।

