कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्दरमैया ने उनके विरुद्ध तैयार किए गए एक कथित फर्जी स्टिंग ऑपरेशन वीडियो के संदर्भ में पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई है। उनका आरोप है कि वर्तमान में सत्ता में न होने की स्थिति में उन्हें टार्गेट करने तथा ब्लैकमेल करने के मकसद से इस तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर दी है और वीडियो के मूल स्रोतों की तकनीकी जांच की जा रही है।

अदालत का दरवाजा और जांच की मांग
पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिद्दरमैया ने कहा कि वे इस प्रकरण की पूरी तरह निष्पक्ष जांच के पक्षधर हैं ताकि वास्तविकता सबके सामने आ सके और पर्दे के पीछे छिपे चेहरों बेनकाब हो सकें। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस वीडियो के प्रचार व प्रसारण पर रोक लगाने के वास्ते सिविल कोर्ट से इंजंक्शन ऑर्डर ले लिया गया है। उन्होंने इसे सरासर झूठा और बनावटी करार दिया है।
किन लोगों के नाम आए सामने
सिद्दरमैया ने इस कथित स्टिंग से जुड़े दो खास व्यक्तियों, दक्षिण कन्नड़ की कृपा अल्वा और एक मीडिया संस्थान से जुड़े राकेश शेट्टी का सार्वजनिक रूप से जिक्र किया। उनका दावा है कि राकेश शेट्टी ने इस कृत्य को अंजाम देना कबूल कर लिया है और इस फुटेज में कोई सच्चाई नहीं है। अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लंबे सार्वजनिक जीवन और मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्हें कभी ऐसी ब्लैकमेलिंग नहीं झेलनी पड़ी।
पुत्तूर टिकट और अंदरूनी साजिश के आरोप
सिद्दरमैया के बेटे तथा कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्दरमैया ने दावा किया कि इस कथित स्टिंग के पीछे कांग्रेस के ही भीतर के कुछ लोग शामिल हैं। उनके अनुसार, वीडियो में एक मीडिया संस्थान के प्रमुख और कांग्रेस की एक महिला कार्यकर्ता की मिलीभगत नजर आती है, जो पुत्तूर विधानसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदार थी। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी एक कार्यकर्ता की व्यक्तिगत हरकत के लिए संपूर्ण पार्टी को दोषी नहीं माना जा सकता।

