आज के दौर में हर व्यक्ति किसी न किसी वजह से परेशान नजर आता है और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मन को संभालने या उस पर काम करने के लिए लोगों के पास समय का अभाव है। हालांकि तकनीक ने इंसानों का समय बचाने में काफी मदद की है, लेकिन इसके बावजूद दैनिक जीवन में अपने लिए फुर्सत के पल नहीं बच पाते हैं। ऐसे में यदि तन और मन को स्वस्थ रखना है, तो हमें अपने आंतरिक संतुलन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

मन को मजबूत करने की आवश्यकता
यदि शरीर अत्यधिक कोमल हो तो वह मामूली सी स्थिति में भी आहत हो सकता है, लेकिन अगर मन मजबूत हो तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी पार की जा सकती हैं। आज के समय में लोगों को अपनी मानसिक स्थिति पर काम करने की सबसे अधिक जरूरत है। भारतीय संस्कृति में मन की शांति और स्थिरता के लिए कुछ बेहद उपयोगी और प्राचीन तरीकों का जिक्र मिलता है, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
ओम और स्वस्तिक का विशेष प्रयोग
भारतीय परंपरा में मानसिक स्थिरता के लिए कुछ ऐसे चिह्न और शब्द बताए गए हैं जिनका अभ्यास बेहद चमत्कारिक परिणाम दे सकता है। एकांत में बैठकर जब कभी भी अपने आंतरिक विकास पर ध्यान देना हो, तो कुछ आसान नियमों का पालन किया जा सकता है:

- अपनी कमर को बिल्कुल सीधा रखें और आंखों को बंद कर लें।
- अपने दोनों भौहों के बीच स्थित आज्ञा चक्र पर भीतर से ध्यान केंद्रित करें।
- एकांत में बैठकर ‘ओम’ शब्द का उच्चारण करें।
- उच्चारण के दौरान उस ‘ओम’ को आंतरिक रूप से क्लॉकवाइज स्वस्तिक के चिह्न पर घुमाने का अभ्यास करें।
बाहरी गतिशीलता के साथ आंतरिक शांति
इस तरह के मानसिक अभ्यासों को अपनाने से जीवन में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है। इसका मुख्य लाभ यह होता है कि आप बाहरी दुनिया के कामों में पूरी तरह सक्रिय और गतिमान रहते हुए भी अपने भीतर एक गहरी शांति का अनुभव कर सकते हैं। व्यस्तता के बीच यह संतुलन जीवन को बेहतर बनाने में मददगार साबित होता है।

