वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा की सरकारों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा करना और जमीनी स्तर पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना था।

पंजाब में पराली प्रबंधन और कार्य योजना की समीक्षा
पंजाब सरकार के साथ हुई बैठक में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य कार्य योजना के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया। आयोग ने फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी की उपलब्धता, तैनाती और उसके प्रभावी उपयोग की समीक्षा की। साथ ही, पराली को खेत के अंदर और बाहर दोनों तरीकों से इस्तेमाल करने की व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। निगरानी के लिए सैटेलाइट आधारित फायर अलर्ट, ड्रोन और कम लागत वाले सेंसरों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।
हरियाणा में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर चर्चा
हरियाणा सरकार के साथ हुई बैठक में धान की पराली के अलावा वाहनों से होने वाले प्रदूषण, सड़कों की धूल, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और औद्योगिक प्रदूषण पर व्यापक चर्चा की गई। ईंधन स्टेशनों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली स्थापित करने, पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने और डीजल ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

त्वरित कार्रवाई और समन्वित प्रयासों का आह्वान
आयोग ने सभी संबंधित विभागों, जिला प्रशासनों और एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय के साथ निरंतर निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। पराली प्रबंधन को केवल एक चुनौती के रूप में न देखकर इसे चक्रीय अर्थव्यवस्था और बेहतर औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने के अवसर के रूप में देखने की सलाह दी गई। आयोग ने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने पर इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा।

