कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुई महिला चिकित्सक की दुष्कर्म और हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। मृतका के माता-पिता ने इस मामले के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को भ्रष्टाचार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने जांच की धीमी गति पर भी नाराजगी व्यक्त की है।

संदीप घोष की जमानत और माता-पिता के सवाल
पीड़िता के माता-पिता ने पूर्व प्राचार्य की जमानत पर हैरानी जताते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। मृतका की मां, जो वर्तमान में विधायक भी हैं, ने यह सवाल किया है कि उनकी बेटी की मौत से पहले के घंटों में अस्पताल में जो लोग मौजूद थे, उनसे अभी तक पूछताछ और गिरफ्तारियां क्यों नहीं की गईं। डॉक्टरों के अनुसार घटना आधी रात से सुबह के वक्त के बीच हुई थी, इसलिए उस समयावधि में वहां मौजूद हर व्यक्ति की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मामले से जुड़े तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम और संदीप घोष की भूमिका की जांच कराए जाने की मांग की है। उनका आरोप है कि सबूतों को मिटाने के लिए बेहद जल्दबाजी में कदम उठाए गए थे। वहीं, पीड़िता के पिता ने कहा कि इस मामले में उचित और कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी, और उन्होंने अब तक की जांच की रफ्तार पर असंतोष जताया है।
12 नवंबर को सीबीआई कार्यालय तक मार्च
इस प्रकरण में जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर दो नागरिक संगठनों—’वायस ऑफ अभया’ और ‘वायस ऑफ विमेन’ ने मोर्चा खोल दिया है। इन संगठनों ने आगामी 12 नवंबर को आरजी कर मेडिकल कॉलेज से शुरू होकर सीबीआई कार्यालय तक एक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।
आयोजन से जुड़े लोगों ने आम नागरिकों और विशेष रूप से महिलाओं से इस मार्च में भारी संख्या में जुड़ने की अपील की है। उनका कहना है कि एजेंसी को उपलब्ध तमाम साक्ष्यों के आधार पर सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि मामले की सच्चाई और न्याय सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने गत 17 अक्टूबर को भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में संदीप घोष को जमानत प्रदान की थी।

