मेघालय में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने शनिवार को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला पार्टी के अन्य सभी विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) में शामिल होने के बाद सामने आया है, जिससे वह विधानसभा में पार्टी के एकमात्र शेष विधायक रह गए हैं।

मुख्यमंत्री कोनार्ड के. संगमा को अपना त्यागपत्र सौंपने वाले लिंगदोह ने कहा कि उन्होंने राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालातों और पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रमों का आकलन करने के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने साफ किया कि उनका इस्तीफा किसी दबाव में नहीं बल्कि पूरी तरह से स्वेच्छा से दिया गया है।
पार्टी विधायकों के दल-बदल का असर
इससे पहले हाल ही के महीनों में यूडीपी के कई विधायकों ने अन्य दलों का दामन थाम लिया था। सितंबर महीने में पार्टी के आठ विधायकों ने भाजपा का रुख किया था, जबकि इस महीने तीन अन्य विधायक मुख्यमंत्री की पार्टी एनपीपी में शामिल हो गए। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इन दोनों गठबंधनों को मान्यता दिए जाने के बाद यूडीपी की ताकत घटकर सिर्फ एक विधायक तक सीमित रह गई।
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, मेटबाह लिंगदोह के पास सरकार में बिजली, वस्त्र, जल संसाधन और कराधान जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी।
आगे की रणनीति
यूडीपी प्रमुख ने बताया कि पार्टी की केंद्रीय कार्यकारी समिति इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेगी। भविष्य की रणनीति तय करने के लिए वरिष्ठ पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी।
ज्ञात हो कि साल 2023 के मेघालय विधानसभा चुनाव में यूडीपी ने कुल 12 सीटें जीतकर राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई थी। इन हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद 60 सदस्यीय विधानसभा में एनपीपी की ताकत बढ़कर 36 और भाजपा की संख्या 10 हो गई है।

