देश में चारे के संकट और इसके कारण दुग्ध उत्पादों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नई पहल का उद्देश्य चारे की उपलब्धता को बढ़ाकर देश में पशुधन विकास को बढ़ावा देना और किसानों तथा पशुपालकों को राहत पहुंचाना है।

चारे का संकट और दूध की कीमतों पर असर
देशभर में चारा एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है, जिससे पशुओं के रखरखाव का खर्च बढ़ गया है और उनका दूध उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से अमूल जैसी कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं, जबकि कर्नाटक में दूध के दामों में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए विकसित भारत-जी रामजी योजना के अंतर्गत कई नए कार्यों को शामिल किया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में चारे की कमी को दूर किया जा सके।
योजना के तहत किए जाने वाले प्रमुख कार्य
नई व्यवस्था के तहत राज्यों को अपने कुल खर्च का कम से कम पांच प्रतिशत हिस्सा चारा और पशुधन से जुड़े कार्यों पर लगाने की अनुमति दी गई है। ग्रामीण स्तर पर व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों ही स्तरों पर चारा उत्पादन, चारागाह, चराई भूमि और पेड़ों के साथ घास उगाने की प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, चारे को सुरक्षित रखने के लिए भंडारण केंद्र और साइलेज इकाइयां भी बनाई जाएंगी।
- गांवों में चारा बैंक और सामुदायिक चारागाह का विकास
- पशुओं के लिए नए आश्रय स्थल बनाना और पुराने स्थलों की मरम्मत
- सामुदायिक दूध संग्रह केंद्र और पशु चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण
- प्रोटीन युक्त हरे चारे के लिए अजोला टैंक का निर्माण
पंचायतों की भूमिका और प्राथमिकता
इन सभी विकास कार्यों को पंचायत विकास योजनाओं में शामिल किया जाएगा और ग्राम सभा की मंजूरी के बाद इन्हें आगे बढ़ाया जाएगा। जिन पंचायतों में तीस प्रतिशत से अधिक आबादी पशुधन पर निर्भर है, वहां इन कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस योजना से छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनकी आजीविका का मुख्य आधार पशुपालन और डेयरी है।

