आंध्र प्रदेश सरकार आगामी 31वें सीआईआई पार्टनरशिप समिट 2026 के आयोजन की तैयारियों में तेजी से जुटी हुई है। यह मुख्य आयोजन 12 से 13 नवंबर को विशाखापत्तनम के आंध्र यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग कॉलेज के मैदानों में आयोजित किया जाएगा। इस बड़े कार्यक्रम से पहले, राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए व्यापारिक अवसरों को आसान बनाने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के वास्ते कई कदम उठाए हैं।

मुख्य आयोजन से पहले अमरावती, काकीनाडा, तिरुपति, अनंतपुर और विशाखापत्तनम में पांच क्षेत्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया गया था। इन क्षेत्रीय सम्मेलनों ने निवेशकों को इन स्थानों पर उपलब्ध बुनियादी ढांचे का विवरण प्रदान करने और व्यापारिक संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। इन आयोजनों के दौरान विभिन्न संगठनों ने राज्य सरकार के साथ कुल 195 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
निवेश और रोजगार के अवसर
इन 195 एमओयू के जरिए राज्य में 85,561 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश आने की उम्मीद है। इसके अलावा, इन समझौतों से लगभग 1.56 लाख लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। मुख्य कार्यक्रम में विशाखापत्तनम में हस्ताक्षर किए जाने वाले समझौतों की तैयारियों को अंतिम रूप देने से पहले अधिकारी व्यापार प्रस्तावों के विभिन्न पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
अनुमतियां देने से पहले अधिकारी संगठन की वित्तीय स्थिति, निवेश के बदले सरकार से मांगी जाने वाली सहायता और निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने परिचालन को शुरू करने की क्षमता जैसे बिंदुओं का आकलन कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सभी आवश्यक कारकों का आकलन करने और हरी झंडी मिलने के बाद ही प्रस्तावों को एमओयू की सूची में शामिल किया जा रहा है।
पिछले वर्षों के आंकड़े और परियोजनाओं की प्रगति
साल 2025 में आयोजित पार्टनरशिप समिट के दौरान विभिन्न संगठनों ने सरकार के साथ 600 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें 13 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल था। अधिकारियों का अनुमान था कि इन निवेशों से लगभग 16 लाख लोगों के लिए रोजगार का सृजन होगा। इस वर्ष के सम्मेलन के माध्यम से अधिकारी और अधिक समझौतों को सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
जून 2024 के बाद से विभिन्न संगठनों ने 22.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए कुल 714 एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार ने इनमें से 496 परियोजनाओं की स्थापना के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। इनमें से 267 प्रस्ताव पहले की कार्यान्वयन यानी ग्राउंडिंग के चरण तक पहुंच चुके हैं, और इन परियोजनाओं का मूल्य 5.9 लाख करोड़ रुपये है। अधिकारियों का कहना है कि उद्योगों की शुरुआती स्थापना से लेकर उत्पादन शुरू होने तक एमओयू की लगातार निगरानी के कारण ही यह प्रगति संभव हो पाई है।

