अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर से ईरान में तनाव, कहीं जश्न तो कहीं मातम

अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर से ईरान में तनाव, कहीं जश्न तो कहीं मातम

अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद ईरान में हालात तेजी से बदल गए हैं और तेहरान सहित कई शहरों में राजनीतिक-सामाजिक तनाव देखने को मिल रहा है। जहां शासन-विरोधी युवाओं और समूहों ने इसे बदलाव की शुरुआत बताते हुए नारेबाजी और जश्न मनाया, वहीं सत्ता समर्थकों ने चौराहों और धार्मिक स्थलों पर शोक सभाएं कर श्रद्धांजलि दी। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि इससे ईरान की राजनीति, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है।

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद ईरान में हालात तेजी से बदले हैं और राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में गहरी राजनीतिक-सामाजिक हलचल देखने को मिल रही है।

शनिवार को तेहरान में हुए कथित संयुक्त हमले के बाद सामने आई इस खबर ने देश के भीतर मौजूद वैचारिक विभाजन को खुलकर सामने ला दिया है।

एक ओर शासन-विरोधी समूह इसे संभावित बदलाव और “नई शुरुआत” का अवसर बताकर सड़कों पर जश्न मनाते नजर आए, वहीं दूसरी ओर सत्ता समर्थक तबकों में शोक की लहर है और कई स्थानों पर सामूहिक श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं।

तेहरान और अन्य शहरी इलाकों में कुछ जगहों पर लोगों ने सार्वजनिक स्थलों पर एकत्र होकर खुशी जताई और इसे लंबे समय से चले आ रहे कठोर शासन के अंत के रूप में देखा।स्थानीय सोशल मीडिया पोस्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया कि युवाओं के समूहों ने “परिवर्तन” के नारे लगाए और राजनीतिक सुधारों की मांग दोहराई।

राजधानी के प्रमुख चौराहों और धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में समर्थक जुटे और शोक सभाएं आयोजित कीं। ईरानी सरकारी प्रसारक Press TV की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के एंघेलाब स्क्वायर पर नागरिकों ने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि दी और नेतृत्व के प्रति निष्ठा दोहराई।

अमेरिका और यूरोप के कुछ शहरों में विरोध और समर्थन दोनों तरह के प्रदर्शन हुए हैं। क्षेत्रीय स्थिरता, तेल बाजार और कूटनीतिक समीकरणों पर संभावित प्रभाव को लेकर वैश्विक समुदाय सतर्क है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की आंतरिक राजनीति और उत्तराधिकार की प्रक्रिया आने वाले दिनों में देश की दिशा तय करेगी, जबकि सड़कों पर दिख रहा जश्न और मातम इस ऐतिहासिक मोड़ पर समाज के गहरे विभाजन को रेखांकित करता है।

Anju Kunwar

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