चुनाव आयोग का बड़ा कदम, तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न अंतरिम रूप से फ्रीज

चुनाव आयोग का बड़ा कदम, तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न अंतरिम रूप से फ्रीज

चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। पार्टी के भीतर दो अलग-अलग गुटों द्वारा किए जा रहे दावों के चलते यह कदम उठाया गया है। ममता बनर्जी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर जब इस पार्टी की स्थापना की थी, तब इस प्रतीक की रूपरेखा खुद तैयार की थी।

चुनाव आयोग का बड़ा कदम, तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न अंतरिम रूप से फ्रीज

पार्टी में आंतरिक कल और चुनाव चिह्न विवाद

तृणमूल कांग्रेस के 28 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब पार्टी में इतनी बड़ी फूट सामने आई है। जून के महीने में पार्टी के भीतर असंतोष उभरा, जब विधायकों और लोकसभा सदस्यों ने अलग रुख अपनाते हुए बगावत का झंडा उठाया। दो गुटों के आमने-सामने आने के बाद से ही पार्टी के नाम और अधिकारिक प्रतीक को लेकर खींचतान जारी थी, जिसके बाद आयोग को यह अंतरिम फैसला लेना पड़ा।

नए नामों और चिह्नों का अस्थायी आवंटन

आयोग के इस निर्देश के बाद दोनों पक्षों ने अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न भेजे हैं। फिलहाल आगामी छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न मिला है। वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम तथा ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था दोनों पक्षों के बीच मूल पार्टी और चिह्न पर अंतिम निर्णय आने तक लागू रहेगी।

1969 के इंदिरा गांधी विवाद से तुलना

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में फैसला चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत किया जाता है। इसी तरह के कानूनी प्रावधान का उपयोग वर्ष 1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के दौरान हुआ था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और विरोधी गुट के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। उस समय संगठन और विधायिका में बहुमत के समर्थन को आधार बनाते हुए इंदिरा गांधी के गुट को असली कांग्रेस माना गया था, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृति भी प्राप्त हुई थी।

Anju Kunwar

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