दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने आठ साल पुराने एक लापता मामले को सुलझाते हुए एक नाबालिग लड़की को बिहार से सुरक्षित वापस ढूंढ निकाला है। साल 2018 में दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हुई 14 वर्षीय लड़की को पुलिस टीम ने समस्तीपुर जिले से बरामद किया है। इस सफलता के बाद पुलिस ने लड़की को उसके माता-पिता को सौंप दिया, जिससे परिवार की वर्षों की लंबी प्रतीक्षा समाप्त हो गई।

साल 2018 में दर्ज हुआ था मामला
केंद्रीय जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर सिंह के अनुसार, इस संबंध में 14 अक्टूबर 2018 को आनंद पर्वत पुलिस स्टेशन में अपहरण की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय जिले की एएचटीयू शाखा को भी जांच में शामिल किया गया था। शुरुआती वर्षों में कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के बावजूद पुलिस ने इस मामले की फाइल बंद नहीं की और लगातार प्रयास जारी रखे।
व्यापक तलाश और तकनीकी निगरानी का उपयोग
तलाश अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 90 आश्रय गृहों, 52 अनाथालयों, विभिन्न धार्मिक स्थलों और अन्य संदिग्ध स्थानों की गहन तलाशी ली। दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और सैकड़ों लोगों से पूछताछ की गई। कुछ महीने पहले पुलिस को कानपुर में लड़की के होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद एक विशेष टीम का गठन किया गया। हालांकि, जब तक पुलिस वहां पहुंचती, लड़की को दूसरी जगह ले जाया गया था। इसके बाद तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय सूत्रों की मदद से उसके बिहार के समस्तीपुर में होने का पता चला।

बिहार के समस्तीपुर से हुई बरामदगी
ठोस जानकारी मिलने के बाद एएचटीयू की एक समर्पित टीम ने 15 सितंबर को समस्तीपुर के लिए प्रस्थान किया। स्थानीय शाहपुर पटोरी पुलिस स्टेशन के साथ समन्वय स्थापित कर एक संयुक्त छापेमारी की गई और लड़की को सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया गया। 17 सितंबर को उसे दिल्ली वापस लाया गया, जहां उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और पेशेवर काउंसलिंग दी गई। अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लड़की को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। आठ साल बाद अपनी बेटी को पाकर परिजनों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया।

