उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सैनिक विभाग ने हाल ही में देहरादून में सैन्यधाम परियोजना को लेकर एक बड़ा धरना-प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और पूर्व सैनिकों ने परियोजना की कुल लागत, खर्च, टेंडर और निर्माण कार्य का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की भी जोरदार मांग उठाई गई है।

सैन्यधाम परियोजना पर उठे सवाल
पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने कहा कि सैन्यधाम शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील विषय है। उन्होंने मांग की कि जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस परियोजना की स्वीकृत लागत कितनी है, अब तक कितना पैसा खर्च किया जा चुका है और विभिन्न कार्य किन एजेंसियों को सौंपे गए हैं। इसके अलावा, परियोजना में हुए संशोधनों और निर्माण की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
मंत्री के बयान और अन्य मुद्दों पर आपत्ति
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के एक कथित बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई। कर्नल राम रतन नेगी ने इस बयान की आलोचना की, जिसके बाद कार्यक्रम में मौजूद पूर्व सैनिकों एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री के इस्तीफे से संबंधित एक प्रस्ताव भी पारित किया।
इसके अलावा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष सुजाता पॉल और प्रवक्ता अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने भी सरकार पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने उद्यान विभाग से जुड़े मामलों, मसूरी क्षेत्र में जंगलों के कटान, और न्यायालय में विचाराधीन मामलों से जुड़े विषयों पर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

‘सैन्यधाम का हिसाब दो’ अभियान के तहत मांगें
धरना स्थल पर ‘सैन्यधाम का हिसाब दो’ अभियान के तहत सरकार के सामने निम्नलिखित मुख्य सवाल रखे गए:
- सैन्यधाम की कुल स्वीकृत लागत कितनी है?
- अब तक इस परियोजना पर कितना खर्च आया है?
- लागत में कितनी बार संशोधन किया गया है?
- किस एजेंसी को कौन सा निर्माण कार्य सौंपा गया है?
- अब तक कितना काम पूरा हुआ है और शेष कार्य कब तक समाप्त होगा?
धरना समाप्त होने के बाद कांग्रेस और पूर्व सैनिक विभाग की ओर से एक मांग-पत्र संबंधित अधिकारियों के माध्यम से सरकार को भेजा गया, जिसमें सभी वित्तीय और निर्माण संबंधी विवरणों को जल्द से जल्द सार्वजनिक करने की मांग दोहराई गई।

