जम्मू-कश्मीर विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव लाया गया है। इस प्रस्ताव को लेकर सदन में आगे विचार-विमर्श किया जाएगा।

विधानसभा में पेश हुआ प्रस्ताव
जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने विधानसभा के चल रहे शरद सत्र में इस प्रस्ताव को पेश किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य केंद्र सरकार से यह आग्रह करना है कि बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23 में आवश्यक वैधानिक संशोधन किया जाए। इसके जरिए 1 जनवरी 2019 से पहले नियुक्त किए गए सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने से छूट दिए जाने की मांग की गई है.
इसके साथ ही प्रस्ताव में केंद्र सरकार से यह भी अपील की गई है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के माध्यम से आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं और इसके लिए औपचारिक अधिसूचना जारी की जाए।

विपक्ष का रुख और आगामी चर्चा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विपक्षी सदस्यों ने इस प्रस्ताव का विरोध नहीं किया, बल्कि इस पर विधिवत चर्चा कराने की मांग रखी। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राटर ने जानकारी दी कि इस प्रस्ताव पर आगे चर्चा की जाएगी।
शिक्षकों के संगठनों की प्रतिक्रिया
सरकार के इस कदम का ऑल टीचर्स एसोसिएशन जेएंडके ने स्वागत किया है। हालांकि, संगठन ने मांग की है कि प्रस्ताव में तय की गई 1 जनवरी 2019 की कट-ऑफ तारीख को बदलकर 31 अक्टूबर 2019 या 1 नवंबर 2019 किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 31 अक्टूबर 2019 को लागू हुआ था, इसलिए उस तारीख से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को छूट के दायरे में सुरक्षा मिलनी चाहिए।

