दून के विश्वविद्यालय में दिखी दुनिया की सबसे लघु नस्ल की नैनो गाय

दून के विश्वविद्यालय में दिखी दुनिया की सबसे लघु नस्ल की नैनो गाय

श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में आंध्र प्रदेश की रमन्यापेट नादीपथी नैनो गाय की एक जोड़ी लाई गई है, जो दुनिया की सबसे छोटी नस्ल मानी जाती है। देहरादून में पहली बार इस अनूठी प्रजाति के वैज्ञानिक तरीके से पालन-पोषण और अध्ययन की शुरुआत की गई है। इस दुर्लभ जोड़ी को देखने के लिए स्थानीय पशु प्रेमियों में भारी उत्सुकता और उत्साह बना हुआ है।

दून के विश्वविद्यालय में दिखी दुनिया की सबसे लघु नस्ल की नैनो गाय

नैनो गाय की विशेषताएँ और आकार

नैनो गाय की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद छोटा आकार है। इस प्रजाति की लंबाई और ऊँचाई लगभग डेढ़ से दो फीट के बीच होती है। इसके छोटे आकार और कम चारे की जरूरत के कारण इसे शहरी इलाकों में भी गोपालन के एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि सीमित जगह में इस प्रकार का गोपालन कितना कारगर साबित हो सकता है।

शोध और अनुसंधान कार्य

विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों, शोधार्थियों, फैकल्टी सदस्यों और पशु चिकित्सकों द्वारा इस नस्ल के स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन क्षमता, दूध की गुणवत्ता और उत्तराखंड के मौसम के अनुकूल ढलने की क्षमता पर शोध किया जाएगा। एसजीआरआर विश्वविद्यालय की विभिन्न गौशालाओं में पहले से ही देश के अलग-अलग राज्यों की गायों पर अनुसंधान चल रहा है। इस नई प्रजाति के आने से इस दिशा में चल रहे शोध कार्यों को एक नई दिशा मिलेगी।

दून के विश्वविद्यालय में दिखी दुनिया की सबसे लघु नस्ल की नैनो गाय

भविष्य की योजनाएँ

संस्थान का उद्देश्य गोपालन को वैज्ञानिक अनुसंधान और छात्रों की प्रायोगिक शिक्षा के साथ जोड़कर एक उपयोगी मॉडल तैयार करना है। आने वाले समय में प्रजनन प्रक्रिया के जरिए इनकी संख्या में वृद्धि करने और अन्य पशुपालकों तक इस नस्ल को पहुँचाने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।

Anju Kunwar

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