खाद्य सुरक्षा और चेतावनी लेबल: एक स्वस्थ भारत के लिए समग्र नीति की जरूरत

खाद्य सुरक्षा और चेतावनी लेबल: एक स्वस्थ भारत के लिए समग्र नीति की जरूरत

भारत में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के सामने चेतावनी के निशान लगाने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से यह बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है ताकि खरीदार को आसानी से यह पता चल सके कि उत्पाद में नुकसानदायक तत्व कितनी मात्रा में हैं।

खाद्य सुरक्षा और चेतावनी लेबल: एक स्वस्थ भारत के लिए समग्र नीति की जरूरत

फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग और वर्तमान स्थिति

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के एक प्रस्ताव के तहत उन खाद्य पदार्थों के पैकेट के सामने लाल षट्कोण में उच्च चीनी, नमक या वसा की चेतावनी लिखने का सुझाव दिया गया है जो तय सीमा से अधिक हैं। फिलहाल बाजार में मिलने वाले सामानों पर बड़े अक्षरों में स्वास्थ्यवर्धक दावे लिखे होते हैं, जबकि हानिकारक तत्वों की जानकारी पीछे छोटे अक्षरों में होती है। कई अन्य देशों में ऐसे स्पष्ट प्रतीक लागू किए जा चुके हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।

प्रस्ताव की सीमाएं और चुनौतियां

इस प्रस्ताव में कुछ कमियां भी हैं, जैसे कि शुरुआती चरण में चेतावनी तभी लागू होने की बात कही गई है जब दो या अधिक पोषक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक हों। विशेषज्ञों का सुझाव है कि नियम सरल होने चाहिए और जिस भी तत्व की मात्रा अधिक हो, उसकी स्पष्ट चेतावनी सामने दिखाई देनी चाहिए। इसके अलावा, भारत में इस तरह की लेबलिंग पर पिछले एक दशक से विचार चल रहा है, जिसे अब अनिश्चितकालीन देरी से बचाकर जल्द लागू किया जाना चाहिए।

खाद्य सुरक्षा और चेतावनी लेबल: एक स्वस्थ भारत के लिए समग्र नीति की जरूरत

बेहतर खाद्य व्यवस्था का निर्माण

केवल चेतावनी लेबल को ही सारी समस्याओं का जादुई समाधान मान लेना गलत होगा। लोगों के खान-पान के विकल्प विज्ञापनों, कीमतों, आदतों और उपलब्धता से भी तय होते हैं। इसलिए, केवल उपभोक्ताओं पर जिम्मेदारी डालने के बजाय विज्ञापनों पर कड़े नियम, स्कूलों के पास स्वस्थ भोजन की उपलब्धता और उद्योगों को स्वास्थ्यकर उत्पाद बनाने के लिए प्रेरित करने जैसी व्यापक नीतियों की आवश्यकता है ताकि एक समग्र और स्वस्थ खाद्य व्यवस्था तैयार हो सके।

Anju Kunwar

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