संयुक्त राष्ट्र महासभा में एस जयशंकर का कड़ा संदेश, आतंकवाद और पाकिस्तान पर की तीखी टिप्पणी

संयुक्त राष्ट्र महासभा में एस जयशंकर का कड़ा संदेश, आतंकवाद और पाकिस्तान पर की तीखी टिप्पणी

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि जब यह संस्था अपने अस्तित्व के नौवें दशक में कदम रख रही है, तब पूरी दुनिया के सामने संघर्ष और टकराव मुख्य चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए इस संगठन की स्थापना की गई थी, लेकिन आज शांति स्थापित करने में हो रही विफलता सुरक्षा को कमजोर कर रही है और विकास कार्यों को भी प्रभावित कर रही है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में एस जयशंकर का कड़ा संदेश, आतंकवाद और पाकिस्तान पर की तीखी टिप्पणी

सीमा-पार आतंकवाद और जवाबदेही

अपने भाषण में विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद वैश्विक शांति के लिए एक निरंतर खतरा है, जो राज्य-प्रायोजित भी हो सकता है और सीमा-पार की गतिविधियों को बढ़ावा देता है। ऐसी हरकतों में शामिल सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जाना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद को लेकर ‘जीरो-टॉलरेंस’ के रुख में किसी प्रकार की ढील स्वीकार नहीं की जानी चाहिए और इसके आर्थिक तंत्र पर विशेष रूप से प्रहार होना चाहिए।

पाकिस्तान के रुख पर प्रहार

पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार करते हुए डॉ. जयशंकर ने उसे आतंकवाद का निरंतर अभ्यास करने वाला राष्ट्र करार दिया। उन्होंने पिछले दिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा कि वहां की तरफ से तथ्यों को पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने आगे कहा कि जिन देशों का संघर्षों से सीधा नाता नहीं है, उन्हें भी अकारण सजा भुगतनी पड़ रही है और प्रभावित पक्षों की आवाज को अक्सर अनसुना कर दिया जाता है।

समुद्री सुरक्षा और अन्य वैश्विक संघर्ष

अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर हमले किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की हिफाजत करने और ऊर्जा व व्यापार के मार्ग को सुचारू रखने की गुजारिश की है। यूक्रेन संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अंतहीन लड़ाइयों के बजाय युद्ध समाप्ति के प्रयास होने चाहिए। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया के हालातों पर बोलते हुए उन्होंने स्थायी शांति के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ की वकालत की और बताया कि भारत फलस्तीनी नागरिकों के लिए राहत और मानवीय सहायता में सहयोग दे रहा है।

Anju Kunwar

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