सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम रुख अपनाते हुए इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से साफ मना कर दिया है। अदालत का मानना है कि पूरी तरह रोक लगाने से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं, लेकिन साथ ही चौबीसों घंटे आतिशबाजी करने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती है। इस मामले में संतुलन बनाने के लिए न्यायालय ने पटाखे जलाने के वास्ते एक निश्चित समय सीमा तय करने का सुझाव दिया है।

बीच का रास्ता निकालने की जरूरत
न्यायालय की बेंच ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो पटाखों पर मुकम्मल बैन लगाया जा सकता है और न ही दिनभर आतिशबाजी की छूट दी जा सकती है। पूरे दिन पटाखे फोड़ने की अनुमति देने से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों समेत सभी जीवित प्राणियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए, एक ऐसा व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए जिसमें तयशुदा घंटों के भीतर ही पटाखे चलाने की अनुमति हो।
ग्रीन क्रैकर्स और शर्तों पर विचार
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष एक नोट भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें वैज्ञानिक सिफारिशों के आधार पर कुछ विशेष ग्रीन क्रैकर्स के लिए सीमित छूट देने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत ये शर्तें रखी गई हैं कि पटाखे तय मानकों के अनुरूप हों, लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं द्वारा बनाए गए हों और निर्धारित ध्वनि सीमा का सख्ती से पालन करते हुए उनमें प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल न किया गया हो।
बेरियम के इस्तेमाल पर अगली सुनवाई
पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से जुड़े कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर अब आगामी 15 अक्टूबर को सुनवाई की जाएगी। अदालत इस विषय पर सभी पक्षों को सुनकर आगे का निर्णय लेगी।

