केंद्र सरकार ने देश के दलहन और तिलहन किसानों को बड़ी राहत देते हुए खरीद व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। इसके तहत बाजार में इन फसलों का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आने पर केंद्रीय एजेंसियां सीधे मंडियों में उतरकर किसानों से उपज खरीदेंगी।

खरीद प्रक्रिया में होगा बदलाव
पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार, एमएसपी पर खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत होती है, जिसमें संबंधित राज्य सरकार के अनुरोध के बाद केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय होती हैं। इस प्रक्रिया में कई बार बाजार भाव गिरने और सरकारी खरीद शुरू होने के बीच अंतराल आ जाता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। अब इस अंतराल को खत्म करने के लिए नेफेड और एनसीसीएफ को बिना राज्य के अनुरोध के सीधे हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए गए हैं।
समय से पहले तैयारियों का निर्देश
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नेफेड और एनसीसीएफ को निर्देश दिए हैं कि जिन फसलों के दाम एमएसपी से नीचे फिसल जाएं, उनकी समय पर खरीद सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जिला स्तर पर उत्पादन, मंडी आवक और भंडारण क्षमता का पूर्व आकलन करने को कहा गया है, ताकि फसल बाजार में आने से पहले ही सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।
फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
धान और गेहूं के मुकाबले दलहन और तिलहन के लिए सरकारी खरीद का नेटवर्क सीमित है। मंडियों में एक साथ भारी आवक होने पर कीमतों पर दबाव बनता है और किसानों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है। इस नई पहल से न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा, बल्कि फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। वर्तमान नियमों के तहत तूर, उड़द और मसूर की पूरी उपज खरीदी जाती है, जबकि अन्य के लिए सीमा निर्धारित है।

