भारतीय कृषि क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों का सफर और विकास मॉडल

भारतीय कृषि क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों का सफर और विकास मॉडल

नरेंद्र मोदी के शासनकाल के पिछले पच्चीस वर्षों में भारतीय कृषि क्षेत्र की दिशा और दशा में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। यह प्रशासनिक और नीतिगत यात्रा अक्टूबर 2001 में गुजरात से शुरू हुई थी, जो बाद में मई 2014 के बाद से पूरे देश के फलक पर फैल गई। इस पूरी अवधि के दौरान कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे से लेकर तकनीकी नवाचारों तक कई कदम उठाए गए।

भारतीय कृषि क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों का सफर और विकास मॉडल

गुजरात मॉडल और कृषि विकास की नींव

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरुआती वर्षों में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया था। इस सफलता के पीछे कोई एक योजना नहीं, बल्कि एक पूरा इकोसिस्टम काम कर रहा था। खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए चेक डैम, खेत-तालाब और नर्मदा नहर प्रणाली जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों ने किसानों को कम पानी का उपयोग करके बेहतर पैदावार प्राप्त करने में सक्षम बनाया।

बिजली के मोर्चे पर ज्योतिग्राम योजना के तहत कृषि फीडरों को अलग किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और जीवन स्तर दोनों में सुधार हुआ। सड़कों के विकास से गांवों की बाजारों तक पहुंच आसान हुई। इसके अलावा, कृषि महोत्सव और कृषि रथ जैसे आयोजनों के माध्यम से वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान सीधे गांवों तक पहुंचाया गया, ताकि किसानों को संस्थानों के चक्कर न काटने पड़ें।

भारतीय कृषि क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों का सफर और विकास मॉडल

राष्ट्रीय स्तर पर कृषि नीतियों का विस्तार

जब यही दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया, तो जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसी योजनाओं को बढ़ावा मिला। अमृत सरोवर पहल ने जल स्रोतों के निर्माण और पुनर्जीवित करने में मदद की। इसके साथ ही, मोटे अनाजों यानी मिलेट्स को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी बड़े प्रयास किए गए, जिसे व्यापक सामाजिक समर्थन मिला।

किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए पीएम-किसान योजना के तहत प्रत्यक्ष वित्तीय अंतरण की व्यवस्था की गई। इस डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली ने बिचौलियों की भूमिका को कम किया और सीधे अन्नदाताओं के खातों तक राशि पहुंचाई। इसके अतिरिक्त, सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन भी किया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है।

Anju Kunwar

Learn More →