राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शारीरिक शिक्षा: युवाओं के लिए खुल रहे करियर के नए द्वार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शारीरिक शिक्षा: युवाओं के लिए खुल रहे करियर के नए द्वार

विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षा को महज एक खेल का विषय नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसके सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं को पूरी गंभीरता से अपनाना चाहिए। मेरठ कॉलेज के शारीरिक शिक्षा विभाग में आयोजित एक विशेष संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र में नियमित रूप से कक्षाएं लेने से करियर की नई राहें बन सकती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लागू होने के बाद से इस विषय के महत्व में और अधिक वृद्धि हुई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शारीरिक शिक्षा: युवाओं के लिए खुल रहे करियर के नए द्वार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और बहुविषयक शिक्षा

संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शारीरिक शिक्षा और खेल: चुनौतियां एवं अवसर’ रखा गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए शिक्षाविदों ने बताया कि इस नई नीति ने शिक्षा की पुरानी सीमाओं को समाप्त कर दिया है। अब कला, विज्ञान और वाणिज्य जैसे पारंपरिक विषयों के दायरे से बाहर निकलकर बहुविषयक शिक्षा का दौर शुरू हो चुका है, जिससे खेल और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में भी असीम संभावनाएं पैदा हुई हैं।

कक्षाओं में नियमित उपस्थिति का महत्व

विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी कि वे कॉलेज में नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में उपस्थित रहें। केवल खेल के मैदान तक सीमित रहने के बजाय यदि छात्र इसके सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक पक्षों को गहराई से समझेंगे, तो उन्हें भविष्य में रोजगार और पेशेवर रूप से आगे बढ़ने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। इस अकादमिक सत्र की अध्यक्षता करने वाले कॉलेज के प्राधिकारियों और अन्य संकाय सदस्यों ने भी छात्र-छात्राओं को इस दिशा में मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

Anju Kunwar

Learn More →