प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद मैनेजमेंट गुरु एन. रघुरामन ने अपने एक आलेख के जरिए उनके साथ बिताए पलों को याद किया है। उन्होंने बताया कि कैसे बॉलीवुड और मराठी रंगमंच के दिग्गज अभिनेता ने चकाचौंध भरी जिंदगी से दूर रहकर एक बेहद साधारण और जमीन से जुड़े इंसान का जीवन व्यतीत किया।

सादगी और अनुशासन से भरा जीवन
पुणे में हुई अपनी एक पुरानी मुलाकात को याद करते हुए लेखक ने बताया कि नाना पाटेकर ने अपनी भव्य प्रतिष्ठा के बावजूद हमेशा सादगी को चुना। अच्छी कमाई होने के बावजूद उन्होंने मुंबई के उसी सामान्य 750 वर्ग फीट के घर में रहना पसंद किया, जिसकी दीवारें सादी और सफेद थीं और लकड़ी का साधारण फर्नीचर था। उन्हें आलीशान जीवनशैली अपनाने में कोई रुचि नहीं थी और वे हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहे।
किसानों के कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता
लेखक के अनुसार, अभिनेता किसानों की दुर्दशा से खासे चिंतित रहते थे और वे अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उनके कल्याण में खर्च करते थे। उनका मानना था कि अभिनय वे केवल अपने दैनिक खर्च और बिल चुकाने के लिए करते हैं। उनका यह दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण था कि उनके लिए धन से ज्यादा महत्वपूर्ण मानवीय संवेदनाएं और दूसरों का दर्द कम करना था।

जीवन का असली संदेश
नाना पाटेकर का जीवन इस बात की मिसाल देता है कि असली दौलत केवल भौतिक वस्तुएं खरीदना नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे का बोझ हल्का करना है। दीवारों पर पेंटर के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाले इस कलाकार ने अंत तक आमजन और विशेषकर किसान समुदाय के साथ अपने गहरे रिश्ते को बनाए रखा।

