संतकबीरनगर में गांवों के विकास कार्यों की योजना को डिजिटल और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में नए कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत वीबीजी रामजी योजना को युक्तधारा पोर्टल से जोड़कर सेटेलाइट आधारित भौगोलिक जानकारी का उपयोग करने की व्यवस्था की जा रही है। इस तकनीक के माध्यम से गांवों में प्रस्तावित विकास कार्यों की जरूरत, स्थान और भौगोलिक स्थिति को डिजिटल भू-नक्शों पर आसानी से देखा जा सकेगा।

सेटेलाइट तकनीक से तय होगी गांवों की जरूरत
युक्तधारा पोर्टल पर सेटेलाइट आधारित भौगोलिक जानकारी का इस्तेमाल करने से गांव की जमीन, जल, प्राकृतिक संसाधनों और मौजूदा आधारभूत सुविधाओं की सटीक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा। इससे अधिकारियों और योजना तैयार करने वालों को यह स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में किस प्रकार के कार्य की वास्तविक आवश्यकता है। अब तक ज्यादातर योजनाएं केवल कागजी प्रस्तावों और अभिलेखों के आधार पर तैयार होती थीं, लेकिन इस डिजिटल बदलाव से कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को कम करने में सहायता मिलेगी।
दोहरी योजनाओं पर रोक और पारदर्शिता
पोर्टल पर डिजिटल लोकेशन और परिसंपत्तियों का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से एक ही स्थान पर बार-बार समान कार्य प्रस्तावित करने या एक ही कार्य को अलग-अलग योजनाओं में दिखाने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे विकास कार्यों में दोहरीकरण को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब डिजिटल रिकॉर्ड के साथ-साथ धरातल पर भी कार्यों की गुणवत्ता और स्थिति की नियमित रूप से जांच की जाए।
विविध विकास कार्यों में मिलेगी मदद
इस तकनीकी प्रणाली का उपयोग जल संरक्षण, भूमि सुधार, तालाब निर्माण, पौधरोपण और नाला विकास जैसे रोजगारपरक परिसंपत्तियों के कार्यों की प्लानिंग में भी किया जा सकेगा। सेटेलाइट भू-नक्शे पर आधारित डेटा के जरिए उपयुक्त स्थानों का चयन करने और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कार्यों की प्राथमिकता तय करने में आसानी होगी।

