अमेरिका में PERM प्रक्रिया निलंबित: जानिए भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों पर इसका असर

अमेरिका में PERM प्रक्रिया निलंबित: जानिए भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों पर इसका असर

अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को ‘प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट’ (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया गया है। इस निलंबन के दायरे में माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और कैपजेमिनी जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, जिसके बाद अब ये कंपनियां कोई भी नया आवेदन दाखिल नहीं कर सकेंगी।

अमेरिका में PERM प्रक्रिया निलंबित: जानिए भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों पर इसका असर

PERM कार्यक्रम क्या है और यह कैसे काम करता है?

पीईआरएम (PERM) अमेरिकी श्रम विभाग की एक स्थायी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया है, जो रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड (ईबी-2 और ईबी-3 श्रेणियों) के लिए एक अनिवार्य पहला कदम माना जाता है। इसके तहत नियोक्ता को श्रम विभाग के सामने यह साबित करना होता है कि उस पद के लिए कोई भी सक्षम, योग्य और उपलब्ध अमेरिकी नागरिक कामगार नहीं है, और विदेशी नागरिक को काम पर रखने से स्थानीय कर्मचारियों के वेतन या कामकाजी परिस्थितियों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन चरण शामिल होते हैं: सबसे पहले प्रचलित मजदूरी का निर्धारण (PWD) किया जाता है, जिसके बाद श्रम बाजार परीक्षण या भर्ती प्रक्रिया चलती है, और अंत में पीईआरएम फाइलिंग की जाती है। प्रमाणन मिलने के बाद नियोक्ता अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के पास फॉर्म I-140 दाखिल कर सकते हैं। फाइलिंग की तारीख ही कर्मचारी की ‘प्राथमिकता तिथि’ बनती है, जो ग्रीन कार्ड की कतार में उसकी जगह तय करती है।

भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों पर प्रभाव

भारतीय आईटी दिग्गजों और उद्योग संगठनों का मानना है कि इस कदम का अल्पकालिक प्रभाव सीमित रह सकता है क्योंकि कई कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में इस प्रक्रिया पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है। हालांकि, लंबे समय में इससे व्यावसायिक मॉडल और ऑन-शोर सेवाओं की लागत पर असर पड़ सकता है।

सबसे ज्यादा जोखिम शुरुआती या मध्यम स्तर के उन भारतीय पेशेवरों पर है जिनकी पीईआरएम प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, या जो अपने एच-1बी वीजा कार्यकाल के अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों के आवेदन बीच में ही लटक गए हैं, उन्हें एक लंबी अनिश्चितता और अतिरिक्त देरी का सामना करना पड़ सकता है।

Anju Kunwar

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